40 लाख का पैकेज, जानिए क्यों इस युवा ने ब्रिटेन की आलीशान नौकरी को मारी लात
जिंदगी जरूरी है या पैसा। सार्वजनिक जीवन में यह सवाल अक्सर विमर्श में रहता है। भागदौड़ भरी जीवनशैली में शांति, आराम और सुकून के पल पीछे छूट रहे हैं। दिमाग में गुस्सा, तनाव व चिड़चिड़ापन हावी हो रहा है। जिन्हें जीवन की अहमियत समझ में आती है, वह आकर्षक जॉब तथा पैसे के प्रति मोह को त्यागने में कतई देरी नहीं करते हैं।
जीवन में पैसा ही सबकुछ नहीं
सोशल मीडिया पर वायरल मानव शाह की कहानी पढ़े-लिखे युवाओं के लिए किसी बड़े सबक से कम नहीं है। पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट मानव शाह ने नई मिसाल पेश की है। ब्रिटेन में वह लगभग चालीस लाख के सालाना पैकेज की नौकरी करते थे। प्रत्येक कार्यदिवस में काम की अवधि आठ घंटे की थी। शुरुआत में उन्हें यह मोटा पैकेज करियर के लिहाज से टर्निंग प्वाइंट नजर आया, मगर धीरे-धीरे उन्हें अहसास होने लगा कि जीवन में पैसा ही सबकुछ नहीं होता। प्रतिदिन आठ घंटे की नौकरी उन्हें जेल के भीतर का अहसास कराने लगी।
काम की अधिकता व तनाव के बीच सुकून गायब हो चुका था। काफी सोच-विचार के बाद मानव शाह को आखिर वह फैसला करना पड़ा, जिस पर अब सोशल मीडिया यूजर्स की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। दरअसल मानव ने नौकरी छोड़कर ब्रिटेन से भारत लौटने का निर्णय कर लिया है। भविष्य में वह अपना कारोबार करने की सोच रहे हैं। मानव शाह ने इंस्टाग्राम पर साझा वीडियो में बताया कि वह एनएचएस में काम कर खुद को नौ से पांच की सख्त दिनचर्या में बंधा महसूस करते थे।
उन्होंने इस नौकरी को “जेल जैसा” बताया, जहां उन्हें न तो आजादी मिल रही थी और न ही अपने तरीके से आगे बढ़ने का अवसर। ब्रिटेन से भारत लौटने का फैसला उनके जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक था। मानव की आपबीती उन युवाओं के लिए सबक है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत विदेश में हाई पैकेज की जॉब का सपना देखते हैं।
मन की शांति कभी नहीं दे सकता है पैसा
पैसा आधुनिक सुविधाओं को भोगने का जरिया बन सकता है, मगर मन की शांति एवं सुकून प्रदान नहीं कर सकता। प्रतिस्पर्धा के युग में युवा तेजी से तनाव की चपेट में आ रहे हैं। डिप्रेशन के अलावा उन्हें हार्ट, बीपी और शुगर जैसी बीमारियां भी हो रही हैं। जिस पैसे के लिए वह दिन-रात भागदौड़ करते हैं, आखिर में वहीं पैसा उन्हें बीमारियों से पार पाने को मोटे इलाज पर खर्च करना पड़ता है। करियर का अत्यधिक दबाव, उच्च प्रतिस्पर्धा, और असफलता का डर आज की युवा पीढ़ी में तनाव, चिंता और अवसाद का मुख्य कारण बन रहा है।
साठ प्रतिशत से अधिक युवा पेशेवर प्रतिमाह करियर संबंधी चिंता का अनुभव करते हैं, जिससे बर्नआउट और मानसिक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो रहा है। हाई-प्रेशर जॉब्स और अनिश्चित काम के घंटे युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से थका रहे हैं। इस कारण न सिर्फ कार्यक्षमता घट रही है, बल्कि कई मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
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तकनीक और बाजार में तेजी से होते बदलाव के कारण नौकरी खोने का डर निरंतर बना रहता है। एआई के कारण जॉब सेक्टर में आए दिन हाहाकार की स्थिति देखने को मिलती है। अधिकांश युवा अपने करियर को लेकर असमंजस में हैं, मगर वास्तव में वे असमंजस में नहीं हैं। वे डरे हुए हैं। वे अज्ञात से डरते हैं। वे अगला कदम उठाने से डरते हैं। वे इस बात से डरते हैं कि यदि चीजें ठीक नहीं हुईं तो क्या होगा?

