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‘घूसखोर पंडित’ पर घमासान, जानें इस फिल्म की स्टोरी क्या है जिससे छिड़ गया भारी विवाद

‘घूसखोर पंडित’…। हिंदी फिल्म का यह टाइटल सियासी और सामाजिक बखेड़े का कारण बन गया है। उत्तर प्रदेश में एकाएक सियासत गरमा गई है। पंडित और ब्राह्मण समाज में उबाल देखने को मिल रहा है। विवाद गहराने पर यूपी सरकार को एक्शन में आना पड़ा है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बसपा सुप्रीमो मायावती भी ब्राह्मण समाज के समर्थन में उतर गई हैं।

रिलीज से पहले विवादों में घिरी इस फिल्म का नाम बदलने या इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। ज्यादा दिन नहीं गुजरे जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर बखेड़ा खड़ा हो गया था। सामान्य वर्ग को सड़कों पर उतरना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला शांत हो सका। अब नया मामला प्रकाश में आया है, जिसने समूचे ब्राह्मण समुदाय की त्योरियां चढ़ा दी हैं। फिल्ममेकर नीरज पांडे को चुप्पी तोड़नी पड़ी है। इसके बावजूद मामला शांत होने के आसार नहीं हैं।

क्या है फिल्म की स्टोरी

फिल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी पुलिस इंस्पेक्टर अजय दीक्षित की भूमिका में हैं, जो कि एक भ्रष्ट पुलिसवाला है। किस्मत उसे उसकी गलतियों को सुधारने का एक मौका देती है। फिल्ममेकर नीरज पांडे बेशक दलील दें कि यह मूवी काल्पनिक ड्रामा पर आधारित है, मगर उनकी दलील से सहमत नहीं हुआ जा सकता। मूवी के टाइटल से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत होना स्वाभाविक बात है। सिर्फ मनोरंजन के लिए किसी भी विवादास्पद टाइटल का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जाहिर कर ब्राह्मण समाज के सम्मान को ठेस पहुंचने की बात कर प्रशंसनीय कार्य किया है। यूजीसी के नए नियमों पर उभरे विवाद के दौरान भी बसपा सुप्रीमो का बयान सकारात्मक रहा था। भले वह ब्राह्मण समाज के वोट बैंक को साधने की कोशिश में हों, मगर किसी गलत चीज का खुलकर विरोध कर उन्होंने अच्छी पहल की है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में पिछले कुछ समय में यह तीसरा मौका है, जब ब्राह्मण समाज की नाराजगी सामने आई है।

राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी थी। भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की एकजुटता ने पार्टी हाईकमान को भी बेचैन कर दिया था। नतीजन प्रदेश अध्यक्ष को इस प्रकरण में दिशा-निर्देश देने पड़े थे। यूजीसी मामले के गरमाने पर सोशल मीडिया पर इस प्रकार के मैसेज खूब वायरल किए गए थे कि ‘ब्राह्मण समाज बेशक भाजपा के साथ है, मगर भाजपा उनके साथ नहीं है।’

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नए मामले में सरकार ने जिस तेजी से पुलिस को एफआईआर करने के निर्देश दिए, उससे साफ है कि सरकार दोबारा से ब्राह्मण समाज के निशाने पर आने से बचना चाहती है। हैरत की बात यह भी है कि फिल्ममेकर के अलावा अभिनेता दोनों ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखते हैं, मगर उन्हें मूवी के टाइटल में कोई खोट नजर नहीं आई।

अभिनेता मनोज बाजपेयी जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। वह धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं। अच्छी बात यह भी है कि ब्राह्मण समाज अब अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक व एकजुट दिखाई पड़ रहा है। चूंकि समाज की एकजुटता के नारे अब से पहले सिर्फ परिचय सम्मेलनों में सुनाई पड़ते थे। देशभर के ब्राह्मण संगठनों को इस मुद्दे पर संगठित होने की आवश्यकता है। चूंकि इस समाज का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है।

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