NEET 2026 महाघोटाला: 22 लाख छात्रों का भविष्य नीलाम, माफिया के आगे ‘सिस्टम’ हुआ ढेर!
देश में नकल माफिया का हद से ज्यादा मजबूत सिंडिकेट वाकई चिंता का विषय है। यह सिंडिकेट अपनी कारगुजारियों से बार-बार सिस्टम को बौना साबित कर रहा है। बेखौफ माफिया में न सरकार का डर है, ना कानून का खौफ।
माफिया मजबूत, सिस्टम मजबूर
कुख्यात भू-माफिया और अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन भी समय-समय पर देखने को मिलता रहा है, मगर नकल माफिया के खिलाफ आज तक ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिसे नजीर माना जाए। देशभर में फिलवक्त जिस मुद्दे पर सर्वाधिक विवाद उत्पन्न हो रहा है, वह नीट (यूजी) 2026 एग्जाम का निरस्त होना है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को संपन्न परीक्षा को पेपर लीक पर उपजे विवाद के उपरांत रद्द करने का निर्णय लिया है। केरल और राजस्थान में परीक्षा से जुड़े सौ से अधिक सवाल व्हाट्स अप के जरिए भेजकर नकल माफिया ने खूब पैसा कमाया था। इस एग्जाम में देशभर के 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
केंद्र सरकार ने इस प्रकरण की जांच का जिम्मा अब सीबीआई को सौंपा है। यह कोई पहला मौका नहीं, जब इस प्रकार की गड़बड़ी सामने आई है। पहले भी नकल माफिया अपने जुगाड़ का अहसास करा चुके हैं। इसके बावजूद केंद्र एवं राज्य सरकारों के पास इस समस्या से निपटने का कोई ठोस समाधान नहीं है। परीक्षा रद्द होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में जबरदस्त गुस्सा है।
टेंशन उन शिक्षकों को भी है, जिन्होंने नीट प्रतिभागियों को परीक्षा संबंधी तैयारी कराने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। लाखों विद्यार्थियों ने यह एग्जाम क्लीयर करने के मकसद से दिन-रात मेहनत की थी। यह मुद्दा अब सियासी क्लेश का कारण भी बन गया है। विपक्ष ने केंद्र सरकार और एनटीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे दलों ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने साधा निशाना
राहुल गांधी ने कहा है कि ‘यह अब कोई परीक्षा नहीं रही, नीट अब एक नीलामी बन गई है।’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल का आरोप है कि 10 साल में, 89 पेपर लीक, 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही चुप्पी। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने इस मामले में कड़ी सजा की मांग की है।
उधर, एनटीए ने बेशक नए सिरे से पंजीकरण कराने पर विद्यार्थियों से शुल्क न वसूलने का भरोसा दिलाया है, मगर एग्जाम रद्द होने से कई सौ करोड़ का नुकसान हो चुका है। दोबारा परीक्षा आयोजित होने पर पुन: कई सौ करोड़ का खर्च आएगा। इसका बोझ सरकार को उठाना पड़ेगा। सीधी बात है यह पैसा सरकार अपनी जेब से खर्च नहीं करेगी बल्कि जनता से वसूले गए टैक्स के जरिए से खर्च करेगी। ले-देकर जेब आम आदमी की कटनी है। इसमें दो राय नहीं कि नकल माफिया का सिंडिकेट काफी मजबूत है। इस सिंडिकेट को खाद-पानी कहां से मिल रहा है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
मोबाइल से होगी अब जनगणना, खबर में जानिए सारा प्रोसेस
पेपर लीक का सिलसिला यदि नहीं रुक पाता है तो विद्यार्थियों का इस प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा। पेपर लीक होने से सबसे बड़ा नुकसान मेहनती एवं काबिल छात्र-छात्राओं का होता है। दिन-रात जागकर एवं भूखे प्यासे रहकर जो बच्चे कामयाबी का सपना देखते हैं, उन्हें अंतत: निराशा हाथ लगती है। केंद्र सरकार और एनटीए को भविष्य में ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे नकल माफिया दोबारा ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचें।

