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40 डिग्री तापमान और 1000 मौतें: इस अमीर देश में गर्मी से है बुरा हाल

दुनिया में जलवायु परिवर्तन का प्रतिकूल प्रभाव साल दर साल बढ़ रहा है। भीषण गर्मी और जानलेवा लू के रूप में इसके घातक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद आर्थिक रूप से संपन्न ताकतवर देश कोई प्रभावी कदम उठाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। खुद के गिरेबान में झांकने की बजाए कुछ देश आमतौर पर गरीब एवं अविकसित देशों के सिर पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ देते हैं। यूरोप के विभिन्न देशों में आजकल भीषण गर्मी ने हाहाकार मचा रखा है। फ्रांस से जुड़े कुछ वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा रखी है। इलेक्ट्रॉनिक शोरूम से संबंधित वीडियो खूब शेयर किए जा रहे हैं।

सुबह-सवेरे शोरूम खुलने पर अचानक ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ती है। शोरूम के भीतर एसी, कूलर एवं पंखे खरीदने के लिए मानो लूट मच जाती है। गर्मी से बचाव के इन उपकरणों को खरीदने की खातिर ग्राहकों में खींचतान होती है। फ्रांस में गर्मी से बेहाल नागरिकों की ऐसी हालत पहली बार देखने को मिली है। वहां का तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में नागरिकों की जान पर संकट मंडरा रहा है।

फ्रांस में 40 डिग्री का टॉर्चर, अब तक 1000 से ज्यादा मौतें

खबरों के मुताबिक गर्मी व लू की वजह से फ्रांस में अब तक एक हजार अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं। अगले कुछ दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। अलबत्ता गर्मी से बचने के लिए हर कोई अपने घर में एसी, कूलर व पंखे का इंतजाम कर लेना चाहता है। जलवायु परिवर्तन के लिए अक्सर जो कारण गिनाए जाते हैं, असल में सच्चाई उससे अधिक कड़वी है।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, अनियमित तरीके से कंस्ट्रक्शन, घरों एवं दफ्तरों में एसी के बढ़ते प्रयोग, सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या आदि को जलवायु परिवर्तन की वजह माना जाता है, मगर उस हकीकत पर कोई पुरजोर तरीके से बात नहीं करता, जिस बारे में बोला जाना चाहिए। दरअसल पिछले कुछ साल में विभिन्न देशों के बीच भीषण युद्ध देखने को मिले। जंग के मैदान में अंधाधुंध तरीके से गोला बारूद का इस्तेमाल किया गया। रूस-यूक्रेन जंग हो अथवा अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध, इस दौरान जबरदस्त बमबारी के अलावा परमाणु परीक्षण की होड़ ने भी धरती का तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके लिए वह देश कसूरवार हैं, जो खुद को दुनिया का बॉस समझने की महत्वाकांक्षा पाले हैं।

AC से नहीं थमेगा संकट, समुद्र निगल जाएंगे तटीय शहर

उधर, बढ़ती गर्मी का हल सिर्फ एयर कंडीशन नहीं हो सकते। एसी का उपयोग बढ़ने पर ऊर्जा खपत में भी वृद्धि होती है। इससे जलवायु परिवर्तन की स्थिति और खराब होने का खतरा है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि के अलावा वर्षा के पैटर्न में भी बदलाव आ रहे हैं। लू, बाढ़, सूखा और तूफान के अलावा बवंडर जैसी चरम मौसम घटनाएं अधिक बार होती हैं और अधिक व्यापक रूप से फैलती हैं।

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जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मौसम का चक्र बिगड़ रहा है और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ने लगी हैं। इसका मानव जीवन, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ रहा है। तापमान बढ़ने से ध्रुवों पर मौजूद बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है। ग्लेशियरों के पिघलने और वर्षा चक्र में बदलाव के कारण भूमिगत जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। अभी भी समय है, जागने का, अन्यथा अपनी बर्बादी का कारण इंसान खुद बन जाएगा।

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