ईरान में खामेनेई की अंतिम विदाई पर फूटा जनता का भयंकर गुस्सा; ट्रंप और नेतन्याहू को मारने के लगे नारे, 8 मिनट में तबाही मचाने वाली मिसाइल का टेस्ट
अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बावजूद दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच की ऐतिहासिक कड़वाहट और अदावत पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। वैश्विक कूटनीति की तमाम कोशिशों के बाद भी एक-दूसरे के प्रति शत्रुता का भाव स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार जारी तीखी और भड़काऊ बयानबाजी के कारण मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जिससे यह शांति समझौता कभी भी टूटने की कगार पर है।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, आंसुओं के बीच गूंजे बदले के नारे
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए राजधानी तेहरान में एक बेहद भव्य और ऐतिहासिक राजकीय कार्यक्रम का आयोजित किया गया। इस शोक सभा में दुनिया भर के विभिन्न देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि शामिल हुए। सर्वोच्च नेता को याद कर जहां एक तरफ नम आंखों और गमजदा चेहरों के साथ लोग भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ईरान की आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर देखने को मिला।
अंतिम संस्कार की प्रार्थना के दौरान पूरा माहौल अमेरिका और इजरायल के प्रति गहरी कटुता से भर गया। वहां उमड़ी लाखों की भीड़ एक सुर में ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजरायल मुर्दाबाद’ और ‘ट्रंप और बीबी को मार डालो’ के गगनभेदी नारे लगा रही थी। आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दुनिया ‘बीबी’ के नाम से भी जानती है।
शोक सभा बनी शक्ति प्रदर्शन का केंद्र, लाल झंडों से दहला इजरायल
अंतिम यात्रा के दौरान आक्रोशित नागरिकों के हाथों में ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीरें और शिया परंपरा के अनुसार प्रतिशोध (बदले) की भावना को दर्शाने वाले विशाल लाल झंडे लहरा रहे थे। आयोजकों ने इस पूरे शोक कार्यक्रम को ‘मजबूत ईरान और प्रतिशोध की प्रतिज्ञा’ के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया। पूरी शोक सभा में ‘कोई समझौता नहीं, कोई आत्मसमर्पण नहीं, सिर्फ बदला’ के नारे गूंजते रहे। इस दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों और नागरिकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने की खुली कसम खाई है, जिसने वाशिंगटन और तेल अवीव की सुरक्षा एजेंसियों को भारी बेचैनी में डाल दिया है।
शीर्ष नेतृत्व के खात्मे से भड़की आग, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त पहरा
इस भीषण गुस्से की असली वजह कुछ समय पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों को माना जा रहा है, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के साथ-साथ देश की शीर्ष सैन्य व राजनीतिक लीडरशिप का पूरी तरह खात्मा हो गया था। इसी वजह से तेहरान के भीतर बदले की आग धधक रही है। हालांकि, जमीनी स्तर पर विध्वंसकारी गोलाबारी फिलहाल शांत है, जिससे खाड़ी देशों (Gulf Countries) से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति आंशिक रूप से दोबारा शुरू हो पाई है।
लेकिन, समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर आज भी ईरान की सेना का कड़ा नियंत्रण बरकरार है। वर्तमान में केवल भारी टैक्स (टोल) का भुगतान करने पर ही अंतरराष्ट्रीय जहाजों और तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
शोक के बीच ईरान का बड़ा धमाका: किया नई बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
एक तरफ जहां पूरा ईरान अपने सर्वोच्च नेता की मौत के गम में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ वह वैश्विक मंच पर अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाने से भी पीछे नहीं हट रहा है। अपनी संप्रभुता और आक्रामक रुख को दिखाते हुए ईरान ने एक ऐसी अत्याधुनिक और महा-विनाशक बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) का सफल परीक्षण किया है, जो अपनी त्वरित लॉन्चिंग तकनीक के लिए जानी जाती है।
40 डिग्री तापमान और 1000 मौतें: इस अमीर देश में गर्मी से है बुरा हाल
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मिसाइल को महज 8 मिनट के भीतर फायर किया जा सकता है, जो दुश्मन देश के ठिकानों को पलक झपकते ही मलबे के ढेर में तब्दील करने की क्षमता रखती है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस नाजुक मोड़ पर अमेरिका, इजरायल और ईरान को शत्रुता और सैन्य आक्रामकता बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक वार्ता के जरिए तनाव को कम करना चाहिए, अन्यथा खाड़ी में भड़की यह चिंगारी तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।

