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भारत जैसा ‘जेन जी’ आंदोलन नेपाल में भड़कने का डर, पेपर लीक से मचा हड़कंप

भारत में NEET परीक्षा और पेपर लीक के मामलों पर उठे सियासी तूफान के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल में भी पेपर लीक का बड़ा मामला सामने आया है। इस घटना के बाद नेपाल की राजनीति में हड़कंप मच गया है और बालेन शाह सरकार पूरी तरह से घबरा चुकी है।

भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों और ‘जेन जी’ आंदोलन के कड़े तेवरों को देखते हुए नेपाल सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है, यही वजह है कि पेपर लीक माफिया के खिलाफ आनन-फानन में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

नेपाल में MBS परीक्षा का पेपर वायरल, छात्रों में भड़का आक्रोश

नेपाल में हाल ही में MBS फर्स्ट सेमेस्टर के ‘ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर’ विषय के एग्जाम के दौरान पेपर माफिया ने बड़ी सेंध लगाई। परीक्षा शुरू होते ही प्रश्न पत्र सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर धड़ल्ले से सर्कुलेट होने लगा, जिससे विद्यार्थियों में भारी आक्रोश फैल गया।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत फौरी कार्रवाई की, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बावजूद बालेन सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे आकर सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी है।

भारत में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और ‘जेन जी’ आंदोलन का असर

भारत में नीट (NEET) परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने के बाद देश भर में सियासी भूचाल आ गया था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन खड़ा किया, जिसके दबाव में अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

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हालांकि इसके बाद यह आंदोलन थमता नजर आया, लेकिन पंजाब, केरल और कर्नाटक के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को टैग कर इन राज्यों के मंत्रियों के खिलाफ आवाज उठाने की मांग की है।

पेपर लीक माफिया पर लगाम कसने के लिए कड़े सिस्टम की दरकार

जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नासूर बन चुका है। दोषियों के खिलाफ केवल कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि उसका जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन होना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कमियां और एड-हॉक व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट भी पहले सवाल उठा चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी माफिया पर कड़ा रुख अपना चुके हैं। अब भारत के बाद नेपाल में भी पेपर लीक का मामला गरमाने से बालेन शाह सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि युवाओं का गुस्सा बड़ी से बड़ी सत्ता को हिलाने की ताकत रखता है।

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