पनीर प्रेमियों को तगड़ा झटका, यूपी समेत इन 5 राज्यों में पनीर उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह रोक
यदि आप भी पनीर खाने के शौकीन हैं और शादी-विवाह से लेकर रेस्टोरेंट या घर पर बड़े चाव से पनीर का लुत्फ उठाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब बाजार में बिकने वाले पनीर को लेकर एक ऐसा सख्त फैसला सामने आया है, जो आपकी थाली की रौनक बदल सकता है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत पांच प्रमुख राज्यों में फूड विभाग ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ और क्यों सरकारों को इस मिलावटी पनीर के खिलाफ इतना बड़ा एक्शन लेना पड़ा।
क्या है एनालॉग पनीर और क्यों मचा है बवाल
आमतौर पर त्योहारी सीजन में ही मिलावटखोरों के सक्रिय होने की बात सामने आती है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग और बहुत बड़ा है। पिछले काफी समय से बाजारों में असली डेयरी पनीर के नाम पर ‘एनालॉग पनीर’ धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि लोगों को यह नकली पनीर असली बताकर सालों से ठगा जा रहा था। फूड सेफ्टी और क्वालिटी के नियमों की अनदेखी के चलते यूपी, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात की सरकारों ने इस पर सख्त शिकंजा कसते हुए इसके व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर में क्या होता है अंतर
आम जनता अक्सर असली और नकली पनीर में फर्क नहीं समझ पाती है, इसलिए दोनों के बीच का अंतर जानना बहुत जरूरी है। असली डेयरी पनीर पूरी तरह से शुद्ध दूध से तैयार किया जाता है और इसमें प्राकृतिक दूध का प्रोटीन होता है, जिसका स्वाद व टेक्सचर भी नेचुरल होता है। इसके विपरीत एनालॉग पनीर मुख्य रूप से तेल, वनस्पति वसा और अन्य कैमिकल चीजों से बनाया जाता है, जिसमें प्रोटीन का स्रोत और मात्रा बिल्कुल अलग होती है। यह नकली या विकल्प वाला पनीर डेयरी पनीर के मुकाबले काफी सस्ता मिलता है, जिसका फायदा उठाकर मिलावटखोर इसे असली बताकर बेच रहे थे।
क्या कानूनन अवैध है एनालॉग पनीर का निर्माण
कानूनी दृष्टिकोण से भारत में एनालॉग पनीर बनाना सीधे तौर पर अवैध नहीं है क्योंकि इसे फूड सेफ्टी नियमों के तहत ‘नॉन-डेयरी सब्सीट्यूट’ यानी पनीर के विकल्प की श्रेणी में रखा गया है। शर्त यह है कि इसे तय मानकों के तहत ही बनाया जाए और ग्राहक को यह साफ-साफ पता होना चाहिए कि वह क्या खरीद रहा है। नियमों के मुताबिक पैकेट पर या होटल-रेस्टोरेंट के मेन्यू में स्पष्ट रूप से ‘एनालॉग’ लिखा होना अनिवार्य है। लेकिन धरातल पर दुकानदार इस नियम का बिल्कुल पालन नहीं कर रहे थे और वे इसे शुद्ध दूध का पनीर बताकर बेच रहे थे, जो कि नियमों का खुला उल्लंघन था।
घर में हैं 60+ बुजुर्ग; तो आज ही घर बैठे बनाएं ये कार्ड, मिलेंगी ढेरों सरकारी सुविधाएं
लैब टेस्ट में फेल हुए 35 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल
इस प्रतिबंध के पीछे सबसे बड़ी वजह आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा है। हाल ही में आई विभिन्न लैब रिपोर्ट्स के चौंकाने वाले आंकड़ों में सामने आया था कि जांच के दौरान पनीर के 35 प्रतिशत से अधिक सैंपल पूरी तरह फेल हो गए थे, क्योंकि उनमें भारी मात्रा में वेजिटेबल फैट और हानिकारक तत्वों की मिलावट पाई गई थी। इस तरह का नकली पनीर खाने से लोगों के शरीर पर सीधा और बुरा असर पड़ सकता है। इसी गंभीर स्वास्थ्य चिंता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पांचों राज्यों में इसे पूरी तरह से बैन करने का कड़ा फैसला लिया है।

