योगी की मातृशक्ति योजनाएं या डिंपल की ‘स्त्री सम्मान’ योजना, महिलाओं के बीच किसकी पकड़ मजबूत
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा घमासान किसी खास जाति, क्षेत्र या चेहरे को लेकर नहीं, बल्कि 5 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं का दिल जीतने के लिए छिड़ चुका है।
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन’ के साथ मुफ्त बस यात्रा और मातृशक्ति योजनाओं के जरिए महिलाओं को लामबंद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत आर्थिक मदद का दांव चलकर भाजपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी में हैं।
5 करोड़ महिला वोटर्स: क्यों यूपी का फैसला अब आधी आबादी के हाथ में है?
उत्तर प्रदेश में कुल 11 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं में से 5 करोड़ से अधिक महिला वोटर हैं। पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के दर्जनों जिलों और विधानसभा सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। यह साइलेंट और निर्णायक वोट बैंक जिस भी दल के पक्ष में झुकता है, उसकी जीत तय मानी जाती है। इसी जमीनी हकीकत को देखते हुए भाजपा और सपा दोनों ने अपने पूरे चुनावी अभियान के केंद्र में महिलाओं को रख दिया है।
योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: 60+ महिलाओं को मुफ्त सफर और सुरक्षा का संदेश
भाजपा सरकार ने रक्षाबंधन से पहले महिला केंद्रित कई बड़े फैसले लिए हैं। राज्य में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए साल भर मुफ्त बस यात्रा की सुविधा लागू की गई है, जबकि त्योहारों पर सभी महिलाओं को विशेष छूट दी जा रही है। भाजपा का पूरा चुनावी नैरेटिव सुरक्षा, कानून व्यवस्था और केंद्र-राज्य की कल्याणकारी योजनाओं (उज्ज्वला, पीएम आवास, शौचालय और मुफ्त राशन) के लाभार्थी नेटवर्क पर टिका है, जिसे पार्टी सीधे तौर पर ‘मातृशक्ति सम्मान’ के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
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डिंपल यादव का नया नैरेटिव
सपा सांसद डिंपल यादव ने भाजपा के लाभार्थी मॉडल को सीधी चुनौती देते हुए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का ऐलान किया है। इसके तहत सपा सरकार बनने पर महिलाओं को प्रति वर्ष 40000 की आर्थिक सहायता देने और हर साल इसमें बढ़ोतरी करने का वादा किया गया है।
डिंपल यादव का कहना है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) में ‘आधी आबादी’ सबसे बड़ा स्तंभ है और महिलाओं को केवल मुफ्त सुविधाएं नहीं, बल्कि सीधी आर्थिक आत्मनिर्भरता चाहिए। सपा में अब डिंपल यादव के अलावा इकरा हसन और प्रिया सरोज जैसे युवा महिला चेहरे भी इस रणनीति को धार दे रहे हैं।
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भाजपा जहां अपने महिला मोर्चा और करोड़ों महिला लाभार्थियों के मजबूत संगठन के जरिए घर-घर पहुंच रही है, वहीं समाजवादी पार्टी युवा महिला नेतृत्व और सीधी नकद मदद के वादे से महिलाओं को अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश की महिला मतदाता योगी सरकार के सुरक्षा-सुविधा मॉडल पर भरोसा जताती हैं या फिर अखिलेश-डिंपल की आर्थिक मजबूती वाली योजना को चुनती हैं।

