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दर्द-ए-आजम: जमानत पर जश्न था जारी, फिर हुई गिरफ्तारी; आजम खान की चट रिहाई, पट गिरफ्तारी!आखिर क्या है पूरी पटकथा?

मो० समीर खान, EELA INDIA NEWS

Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) को जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आने की खुशी कुछ ही मिनटों में नए कानूनी संकट में बदल गई। रामपुर जेल के बाहर समर्थक जश्न मना रहे थे, तभी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में ले लिया। आखिर जमानत के बाद भी आजम खान की रिहाई क्यों नहीं टिक सकी? जानिए पूरा घटनाक्रम।

दर्द-ए-आजम: जमानत मिली, लेकिन आजादी चंद मिनटों की!

लखनऊ/रामपुर। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान चर्चा के केंद्र में हैं। करीब 11 महीने जेल में रहने के बाद 31 अक्टूबर 2026 को आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहाई मिली।

लेकिन आजम खान की यह रिहाई ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। जेल के बाहर समर्थकों की भीड़ और जश्न के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

आखिर जमानत के बाद फिर गिरफ्तारी क्यों?

आजम खान की जमानत और गिरफ्तारी के पीछे दो अलग-अलग कानूनी मामले हैं। यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम कड़ी है।

पहला मामला: दो पैन कार्ड प्रकरण

आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को कथित दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली। अदालत ने 29 अक्टूबर 2026 को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी। इस मामले में आरोप था कि अब्दुल्ला आजम खान के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कथित तौर पर दूसरे पैन कार्ड का इस्तेमाल चुनाव लड़ने की पात्रता हासिल करने के लिए किया गया था। हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई।

दूसरा मामला: ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच

जेल से बाहर आते ही आजम खान के सामने दूसरा कानूनी संकट खड़ा हो गया। ईडी ने उन्हें मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हिरासत में लिया। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच में आजम खान की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। यह मामला दो पैन कार्ड प्रकरण से अलग है।

ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी जमीन और इमारतों को भी धनशोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत अटैच किया है। इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है।

जेल के बाहर आजम खान ने क्या कहा?

ईडी की कार्रवाई के बाद आजम खान ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। आजम खान ने कहा कि एक मुस्लिम द्वारा विश्वविद्यालय और बच्चों के लिए स्कूल बनाना ही उनका अपराध बना दिया गया है। उनके इस बयान के बाद मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया।

अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

आजम खान की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, ईडी की जांच में सामने आए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होना है।

क्या आजम खान को फिर जेल में रहना होगा?

आजम खान को ईडी ने जिस मामले में हिरासत में लिया है, वह दो पैन कार्ड प्रकरण से अलग है। इसलिए एक मामले में जमानत मिलने का अर्थ दूसरे मामले में स्वतः रिहाई नहीं है।

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ईडी की कार्रवाई के बाद उन्हें गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किए जाने और एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए रिमांड मांगने की बात सामने आई। अब उनकी आगे की कानूनी स्थिति अदालत के आदेश और जांच की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

2027 से पहले यूपी की सियासत में आजम खान का मामला क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आजम खान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। रामपुर की राजनीति में आजम खान का प्रभाव लंबे समय से रहा है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई समाजवादी पार्टी की रणनीति और विपक्षी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि, इस घटनाक्रम का चुनावी असर क्या होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल आजम खान की जमानत के बाद हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर यूपी की राजनीति में कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

आजम खान की रिहाई के बाद तत्काल हुई ईडी की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े किए हैं। एक मामले में जमानत, दूसरे मामले में गिरफ्तारी—यही इस पूरे घटनाक्रम की असली पटकथा है। अब सबकी निगाहें गाजियाबाद की विशेष अदालत और आजम खान की आगे की कानूनी लड़ाई पर टिकी हैं।

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