अखिलेश यादव का बड़ा दांव: पार्टी में फेरबदल, केंद्र पर हमला
यूपी की सियासत (up politics) में इस वक्त एक नई हलचल दिख रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (samajwadi party chief akhilesh yadav) ने पार्टी के संगठन को पूरी तरह से नया रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसके तहत राज्य भर के सभी जिला और विधानसभा क्षेत्र प्रभारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब राज्य में अगले साल पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
संगठन (up politics) में बदलाव का संकेत पहले से ही था
पार्टी (samajwadi party) सूत्रों का कहना है कि ये फैसला अचानक नहीं लिया गया है। कई महीनों से पार्टी के भीतर ऐसे संकेत मिल रहे थे कि संगठन में व्यापक फेरबदल हो सकता है। दरअसल, जिन नेताओं को जिलों और विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई थी, वे अलग-अलग दौर में अलग-अलग अभियानों के तहत बनाए गए थे। इनमें से कई को “अपना बूथ मजबूत करो” अभियान के समय ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब उनकी उपयोगिता पर सवाल उठने लगे थे।
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कई परफॉर्मेंस से असंतुष्ट थे अखिलेश
जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव को कुछ प्रभारियों के कामकाज को लेकर निरंतर शिकायतें मिल रही थीं। न केवल कार्य में लापरवाही, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए। यही कारण है कि अखिलेश अब उन लोगों को ज़िम्मेदारी सौंपना चाहते हैं जो पूरी ताकत के साथ संगठन को आगे बढ़ाएं। (samajwadi party news)
नई टीम की घोषणा जल्द
पार्टी के करीबी सूत्रों के अनुसार, नई फेहरिस्त पर काम शुरू हो चुका है और जल्द ही नई जिम्मेदारियों के साथ एक पूरी लिस्ट जारी की जाएगी। यह लिस्ट पंचायत से लेकर विधानसभा तक संगठन को मज़बूती देने के मकसद से तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि यह कदम 2027 की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है।
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बीजेपी पर फिर बरसे अखिलेश यादव
इधर अखिलेश यादव (samajwadi party chief akhilesh yadav) ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। संविधान के 130वें संशोधन विधेयक 2025 को लेकर उन्होंने बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाए हैं। एक संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश ने कहा कि जो सरकारें सत्ता में बने रहने के लिए कानून में बदलाव करती हैं, वे कभी टिक नहीं पातीं। उन्होंने तानाशाही सरकारों का हवाला देते हुए कहा कि इटली, जर्मनी और रूस जैसे देशों में भी ऐसे प्रयास असफल ही रहे।

