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Bihar New CM Update 2026: हो गया कंफर्म, बिहार को मिलने वाला है पहला भाजपाई मुख्यमंत्री, रेस में ये 5 नाम

Bihar New CM Update 2026: बिहार की सियासत एक बार फिर बदलाव के दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। लंबे समय से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। इसी वजह से राज्य में सत्ता के नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में राज्य की कमान भाजपा के हाथों में जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा क्योंकि अब तक राज्य में भाजपा का कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा है। हालांकि यह परिवर्तन तुरंत होने वाला नहीं माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव के बाद ही बड़े फैसले की संभावना

फिलहाल राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। नीतीश कुमार सहित एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने इसके लिए नामांकन दाखिल किया है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि जब तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं हो जाती और परिणाम घोषित नहीं हो जाते तब तक किसी बड़े राजनीतिक निर्णय की उम्मीद कम है।

राज्यसभा चुनाव के नतीजे 16 मार्च को घोषित होने वाले हैं। इसके बाद ही बिहार में सरकार के भविष्य और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर ठोस चर्चा शुरू होने की संभावना है।

गठबंधन संतुलन सबसे बड़ी चुनौती

यदि सत्ता में बदलाव होता है तो सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की होगी। एनडीए के घटक दलों के बीच पदों का बंटवारा भी चर्चा का अहम विषय बन सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष का पद भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह जिम्मेदारी भाजपा के पास है। लेकिन यदि पुराने गठबंधन फार्मूले को बनाए रखने की कोशिश की जाती है तो यह पद जेडीयू को भी दिया जा सकता है।

इसी तरह गृह विभाग को लेकर भी बातचीत संभव है। मौजूदा सरकार में यह विभाग भाजपा के पास है और संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इसे अपने पास बनाए रखना चाहेगी। हालांकि गठबंधन राजनीति को देखते हुए जेडीयू भी इस मंत्रालय में हिस्सेदारी मांग सकती है।

मंत्रिमंडल में हो सकता है बड़ा फेरबदल

राजनीतिक समीकरण बदलने की स्थिति में मंत्रिमंडल की संरचना में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान बिहार सरकार में कुल 26 मंत्री हैं। इनमें 14 मंत्री भाजपा से जुड़े हैं जबकि मुख्यमंत्री सहित नौ मंत्री जेडीयू से आते हैं। बाकी मंत्री सहयोगी दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नई परिस्थितियों में जेडीयू यह कोशिश कर सकती है कि सरकार में उसकी भागीदारी और मजबूत दिखाई दे। इसके लिए मंत्रिमंडल में अपने नेताओं की संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नाम चर्चा में

सबसे अधिक चर्चा अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हो रही है। भाजपा के भीतर कई नेताओं को संभावित दावेदार माना जा रहा है।

मौजूदा सरकार में भाजपा की ओर से दो उपमुख्यमंत्री हैं। सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा। दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में माना जा रहा है। इसके अलावा पार्टी के भीतर संजीव चौरसिया, जनक राम और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नाम की भी चर्चा है।

हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। उम्मीदवार तय करते समय राजनीतिक अनुभव के साथ संगठनात्मक पृष्ठभूमि और सामाजिक समीकरणों को भी महत्व दिया जा सकता है।

जातीय समीकरण भी निभा सकते हैं अहम भूमिका

बिहार की राजनीति में सामाजिक और जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। इसी कारण संभावित नेतृत्व चयन में इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

सम्राट चौधरी का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे कोरी समुदाय से आते हैं। यह राज्य की प्रमुख पिछड़ी जातियों में गिना जाता है। लंबे समय से इस समुदाय से किसी मुख्यमंत्री के न बनने की बात भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रही है।

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दूसरी ओर नित्यानंद राय को संगठन से जुड़े मजबूत नेता के रूप में देखा जाता है। उनका राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है और छात्र राजनीति में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रहे हैं। वे यादव समुदाय से आते हैं जो बिहार की सबसे बड़ी जातियों में गिना जाता है और पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल का मजबूत आधार रहा है।

भाजपा नए चेहरे से भी दे सकती है चौंकाने वाला संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा किसी नए या कम चर्चित चेहरे को भी आगे ला सकती है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में पार्टी ने इसी तरह के फैसले लेकर अचानक नए नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है। इससे राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी की गई है।

इस संभावना को देखते हुए बिहार में भी ऐसा कोई फैसला सामने आ सकता है।

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