बिहार में जेडीयू अब बड़ा भाई नहीं, सीट बंटवारे में खेला कर गई बीजेपी
Bihar Seat Sharing 2025: बिहार चुनाव के लिए एनडीए का सीट शेयरिंग तय हो गया है। लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड अब अलायंस में बड़ा भाई नहीं रही। विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी एक बराबर यानी 101 101 सीट पर लड़ेगी। बड़ा भाई और छोटा भाई को लेकर कोई औपचारिक बात कभी नहीं थी मगर विधानसभा के चुनाव में हमेशा नीतीश कुमार की पार्टी भारतीय जनता पार्टी से कुछ सीटें ज्यादा लड़ती थी।
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जनता दल यूनाइटेड 115 सीटों पर लड़ी जबकि भारतीय जनता पार्टी 110 सीटों पर। बाकी तीन सहयोगी नेता चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को 41 सीटों से मना लिया गया है। बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड की 101, 101 सीटों के अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को 29 सीट मिली है जो दिखाती है कि उन्होंने मूल भाव में अपना काम ठीक से निकलवा लिया है। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटों पर संतोष करना पड़ा।
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2025 में Bihar Seat Sharing की घोषणा पहले जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एक ट्वीट से की और उसी मैटर को उनके बाद उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान के अलावा बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी पोस्ट कर दिया। नीतीश कुमार 2015 का विधानसभा चुनाव लालू यादव की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़े थे। तब जेडीयू और राजद बराबर 101, 101 सीट पर लड़ी थी और कांग्रेस 41 सीट पर।
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इस बार एनडीए में भी दोनों बड़े दलों के बीच वैसा ही बंटवारा हुआ है और बची हुई 41 सीटों में बाकी सहयोगी दलों को एडजस्ट कर लिया गया है। 2010 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो इस साल जनता दल यूनाइटेड 141 सीटों पर और भारतीय जनता पार्टी 102 सीटों पर लड़ी थी। जब एनडीए को अब तक की सबसे बड़ी जीत मिली थी तब जेडीयू 115 सीट और बीजेपी 91 सीट जीत गई थी।
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वहीं 37 सीट में विपक्ष और निर्दलीय सिमट कर रह गए। साल 2005 के चुनाव की बात की जाए तो इस साल फरवरी और अक्टूबर में दो बार चुनाव हुए। अक्टूबर वाले चुनाव में जनता दल यूनाइटेड 139 सीटों पर लड़ी जबकि बीजेपी 102 सीटों पर यही वो चुनाव था जब बिहार में एनडीए की बहुमत की सरकार पहली बार बनी। फरवरी 2005 के चुनाव में जेडीयू 138 और बीजेपी 103 सीट पर लड़ी थी।
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नीतीश कुमार 2000 के चुनाव में खुद की बनाई हुई समता पार्टी से लड़े थे और 2003 में समता पार्टी शरद यादव की अगुवाई वाले जनता दल और रामकृष्ण हेगड़े की लोक शक्ति को मिलाकर जेडीयू का गठन हुआ। जनता दल यूनाइटेड बनने से अब तक विधानसभा के चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी बीजेपी से ज्यादा सीटों पर लड़ती रही थी और इसलिए राजनीतिक बोलचाल में जदयू को बड़ा भाई भी कहा जाता था।
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फिलहाल स्थिति सामने यह है कि अब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को 101 सीटें दी गई हैं। बीजेपी भी साथ में 101 सीटों पर लड़ रही है। अब एनडीए में सीट शेयरिंग के फार्मूले पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने जोरदार तंज कसा है।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि संजय झा ने आज अपना मिशन पूरा कर लिया है। नीतीश कुमार को सीएम की गद्दी छोड़ने के लिए पूरा षड्यंत्र हो गया है। उन्होंने बकायदा सीट शेयरिंग को बीजेपी की एक चाल करार देते हुए कहा कि बीजेपी 101 सीट और चिराग पासवान को 29 सीट। इसके अलावा बीजेपी की ही सहयोगी पार्टियां एचएम और आरएलएम को छह-छह सीटें दी गई हैं।
नीतीश कुमार फिनिश्ड हो गए- पप्पू यादव
उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि टीम बीजेपी 140 प्लस सीट पर लड़ेगी और जनता दल यूनाइटेड 101 पर। पप्पू यादव ने इसे नीतीश कुमार को फिनिश करने का अभियान बताया और कहा कि यह अभियान पूरा हो गया है। नीतीश कुमार फिनिश्ड हो गए।
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पप्पू यादव के अलावा आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने भी एनडीए की सीट शेयरिंग (NDA Seat Sharing 2025) को जेडीयू को समाप्त करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि देखिए अब तो यह एनडीए का सीट शेयरिंग का फार्मूला तय भले ही हो गया हो लेकिन एनडीए में ऑल इज नॉट वेल है। यह स्पष्ट दिख रहा है। जो बात लगातार तेजस्वी जी कह रहे थे, हम लोग कह रहे थे कि बीजेपी जेडीयू को समाप्त कर देगी और मुख्यमंत्री भी नहीं बनाएगी। तो अब वो दृश्य तो दिख रहा है तो हैसियत बता दी। अभी बड़े भाई की भूमिका में जेडीयू रहती थी। बराबरी पर लाया है और चिराग पासवान और बीजेपी ने मिलकर 130 सीट ले ली और चुनाव के बाद जेडीयू को समाप्त बीजेपी कर देगी और मुख्यमंत्री का कुर्सी भी ले लेगी ।
सोशल मीडिया पर सीट शेयरिंग की घोषणा, विपक्ष का हमला
जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ट्विटर (एक्स) पर सबसे पहले सीटों का ऐलान किया। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी पोस्ट किया। घोषणा सोशल मीडिया से हुई, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सब कितनी रणनीति के तहत हुआ।
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ ढीली हो रही है? क्या बीजेपी का मिशन ‘बिहार फतह’ पूरी तरह शुरू हो चुका है और क्या वाकई जेडीयू का “बड़ा भाई” वाला दौर अब इतिहास बन चुका है? इन सवालों के जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे लेकिन इतना तो तय है कि बिहार में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।

