क्या बिना नोटिस हटाया जा सकता है वोटर लिस्ट से नाम, जानें चुनाव आयोग का नियम
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) से पहले वोटर लिस्ट में संशोधन की प्रक्रिया जोरों पर है। चुनाव आयोग (Election Commission) प्रदेश में मतदाता सूची की सफाई (Voter List Cleaning) के लिए एक विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कर रहा है। हालांकि इस कदम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद (Political Dispute) और सदन में भी हंगामा (House Ruckus) देखने को मिला है। विपक्ष का आरोप (Opposition Allegations) है कि इस प्रक्रिया में बिना उचित सूचना के लोगों के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया (Election Process) प्रभावित हो सकती है।
चुनाव आयोग ने साफ किया नोटिस का नियम
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना नोटिस (Notice Rules) के किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए निर्वाचन अधिकारी (Election Officer) या सहायक निर्वाचन अधिकारी (Assistant Election Officer) को पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना जरूरी है। इसका मकसद मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका देना है, ताकि कोई भी गलत कटौती न हो और मतदाता अधिकार (Voter Rights) सुरक्षित रहें।
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‘स्पीकिंग ऑर्डर’ क्या है और क्यों जरूरी
चुनाव आयोग ने ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ (Speaking Order) को जरूरी बताया है, जो एक ऐसा आदेश होता है जिसमें किसी नाम को हटाने का कारण स्पष्ट रूप से लिखा होता है। बिना इस आदेश के कोई भी मतदाता सूची से हटाया नहीं जा सकता। इस नियम के तहत 1 अगस्त को आने वाली मसौदा सूची (Draft List) में भी किसी का नाम नोटिस और आदेश के बिना हटाया नहीं जाएगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता (Transparency) और निष्पक्षता (Fairness) सुनिश्चित करना है।
पूर्व में क्या होता था
इससे पहले कई जगहों पर बूथ लेवल अधिकारी (Booth Level Officer – BLO) यानी BLO द्वारा मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायतें (Voter Complaint) आई थीं। इससे चुनाव प्रशासन (Election Administration) को कई बार विरोध और गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने अब कड़ा नियम बनाते हुए नोटिस और स्पीकिंग ऑर्डर के बिना नाम हटाने पर रोक लगा दी है, जिससे मतदाता सूची विवाद (Voter List Dispute) कम होगा।


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