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सपा को लेकर ये क्या बोल गईं बसपा सुप्रीमो, गुस्से से लाल हो गए शिवपाल

Guest house kand: यूपी की सियासी गलियों में अक्सर पुराने मुद्दे चुनावों से पहले फिर से उभर आते हैं। ऐसे ही एक मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है जिसे सालों बाद फिर से गेस्ट हाउस कांड के रूप में याद किया जा रहा है। इस बार बसपा प्रमुख मायावती ने इस कांड को लेकर एक बयान दिया है, जिसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के अंदर हलचल मच गई है। वहीं, सपा के सीनियर नेता शिवपाल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। इस विवाद के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह महज पुराने विवादों की पुनरावृत्ति है या फिर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है?

मायावती का बयान बना चर्चा का विषय

बसपा चीफ ने हाल ही में बयान दिया कि लखनऊ के गेस्ट हाउस (Guest house kand) में उनके साथ जो हुआ, उसके लिए समाजवादी पार्टी जिम्मेदार थी। इस बयान ने एक बार फिर पुराने विवाद को ताजा कर दिया और सपा-बसपा के बीच की राजनीतिक दुश्मनी को उजागर कर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बहुजन समाज पार्टी का राजनीतिक ग्राफ गिरता हुआ दिखाई दे रहा है।

सन् 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को उम्मीद से कम सीटें मिलीं। कभी यूपी में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली बसपा आज कमजोर स्थिति में है। ऐसे में मायावती का यह कदम रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गेस्ट हाउस कांड, जो पहले केवल एक राजनीतिक घटना थी, अब दलित अस्मिता और सम्मान का प्रतीक बन चुका है। जब भी मायावती इस मुद्दे को उठाती हैं, तो यह दलित समुदाय के सम्मान पर हमले के रूप में पेश किया जाता है।

जानें शिवपाल यादव ने क्या पलटवार किया

वहीं, शिवपाल यादव ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले में क्लीन चिट दे दी है। उनका यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को पूरी तरह से नकार रही है। सपा की रणनीति रही है कि वह पिछड़ा और दलित समुदायों को जोड़कर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक गठबंधन बनाए। इस स्थिति में मायावती का यह हमला सपा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है, खासकर जब वह दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।

क्या बसपा अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम लेगी?

बसपा का हमेशा से यह रुख रहा है कि वह किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। मायावती का मानना है कि गठबंधन से पार्टी का मुख्य वोट बैंक भ्रमित हो सकता है और बसपा की पहचान कमजोर हो सकती है। हालांकि, वर्तमान राजनीतिक माहौल में जब मुकाबला सीधे भाजपा और बाकी विपक्षी दलों के बीच हो रहा है, अकेले चुनाव लड़ना बसपा के लिए कठिन साबित हो सकता है।

2027 की राजनीति में मायावती और शिवपाल के बयानों का असर

मायावती और शिवपाल यादव के बीच गेस्ट हाउस कांड को लेकर छिड़ी यह जुबानी जंग सिर्फ अतीत की राजनीति का पुनरावलोकन नहीं है। यह 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा को प्रभावित करने वाली एक महत्वपूर्ण चाल हो सकती है। अब यह देखना होगा कि क्या मायावती इस पुराने मुद्दे को उठाकर अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन फिर से पा सकती हैं या फिर यह बसपा के लिए एक और संघर्ष का कारण बनेगा।

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आपको बता दें कि सूबे की राजनीति में बदलाव की हवा धीरे-धीरे महसूस हो रही है। मायावती और शिवपाल यादव के बयान सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं हैं बल्कि आने वाले चुनावों में उनकी रणनीति और पार्टी के भविष्य के संकेत भी हो सकते हैं। यह निश्चित रूप से यूपी की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ हो सकता है।

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