कैमरे की चमक में बुझ गया घर का चिराग; गड्ढे में तड़पता रहा युवक, बचाने के बजाय ‘वीडियो’ बनाते रहे लोग
समाज में मानवीय संवेदनाएं क्या समाप्त हो रही हैं? मुश्किल में फंसे व्यक्ति की तत्काल मदद करने की बजाए तमाशा देखने, मोबाइल से वीडियो बनाने पर फोटो क्लिक करने की आदत वाकई चिंताजनक है।
आमतौर पर सड़क पर कोई दुर्घटना होने पर जरा सी देर में तमाशबीनों की भीड़ जुट जाती है। मौत के मुंह में फंसे किसी व्यक्ति की जान बचाने की बजाए घटना का वीडियो व फोटो मोबाइल में कैद करने की मानो होड़ लग जाती है। बाद में वीडियो व फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल कर सिस्टम की नाकाम पर सवाल उठाए जाते हैं।
खूब रोता-बिलखता रहा, फिर भी नहीं की किसी ने मदद
तमाशबीनों की यह खराब आदत आखिरकार पीड़ित की जान पर भारी पड़ती है। ताजा मामला दिल्ली की जनकपुरी कॉलोनी का चर्चाओं में है। जहां जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरने से बाइक सवार कमल ध्यानी (25) की दर्दनाक मौत हो गई। कॉल सेंटर कर्मचारी कमल ड्यूटी से घर लौटते समय हादसे का शिकार हो गया था। बीस फुट गहरे गड्ढे में वह कई घंटे तक घायलावस्था में पड़ा रहा। मदद के लिए वह खूब रोता-बिलखता रहा, मगर किस्मत ने कमल का साथ नहीं दिया। इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी एक महिला के बयान ने समाज में मानवीय संवेदनाओं की कमी को उजागर किया है।
महिला का कहना था कि घटनास्थल पर एकत्र भीड़ में से किसी ने भी पुलिस को फोन करने की जरूरत नहीं समझी बल्कि कई नागरिक अपने मोबाइल में कमल ध्यानी की वीडियो बनाने व फोटो खींचने में मशगूल रहे। यदि यह भीड़ समझदारी का परिचय देकर जरूरी कदम उठाती तो संभवत: कमल की जान बच सकती थी। इस मामले में जितना दोष जल बोर्ड के अधिकारियों और निर्माण ठेकेदार का है, उतना ही दोष उन तमाशबीनों का भी है, जो मौके पर रहकर सिर्फ तमाशा देखते रहे थे। पुलिस ने इस प्रकरण में एक ठेकेदार की गिरफ्तारी की है। जबकि सुरक्षा गार्ड फरार बताया जाता है।
एक्शन में आई सरकार
दिल्ली सरकार भी एक्शन में आई है। कुछ दिन पहले दिल्ली से सटे नोएडा में भी एक प्रकार की एक दर्दनाक घटना प्रकाश में आई थी। जहां निर्माणाधीन शॉपिंग मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में कार डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी। उक्त हादसे ने भी सरकारी सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया था। हैरत की बात यह कि नोएडा हादसे पर खासा हो-हल्ला मचने के बावजूद दिल्ली प्रशासन ने सबक लेना जरूरी क्यों नहीं समझा? देश में ‘मौत के गड्ढों’ की कोई कमी नहीं है। एक ढूंढने निकलेंगे तो सौ मिल जाएंगे।
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सवाल यह कि आखिर इस प्रकार के हादसों पर संबंधित विभाग गंभीर क्यों नहीं दिखा पाते हैं? क्यों उन्हें किसी नए हादसे का इंतजार रहता है? जनकपुरी में जल बोर्ड की तरफ से खोदे गए गड्ढे के आसपास दुर्घटना रोकने के लिए अवरोधक की कोई व्यवस्था नहीं थी। यानी मौत का यह गहरा गड्ढा जानलेवा दुर्घटना को न्योता देता रहा। जल बोर्ड के इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और विभाग इस प्रकार की लापरवाही न बरत सके।
नगर निकायों में कई बार सीवर मैनहोल की सफाई के बाद कर्मचारी ढक्कन लगाना भूल जाते हैं। नतीजन खुले मैनहोल की वजह से गंभीर दुर्घटना होती रहती हैं। नोएडा और दिल्ली हादसे में एक बात सामान्य है कि भरपूर समय होने के बाद भी न सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बचाया जा सका, न कॉल सेंटर कर्मी का नया जीवनदान मिल पाया।

