अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में मचा बवाल, जानें कौन हो सकता है अगला उपमुख्यमंत्री
महाराष्ट्र की राजनीति ने एक अहम मोड़ लिया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने न केवल सत्ता के गलियारों में शोक की लहर दौड़ा दी बल्कि राज्य के भविष्य की राजनीतिक दिशा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना महज एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य उत्पन्न कर गई है जिसे भर पाना फिलहाल मुश्किल लगता है।
अजित पवार के बाद क्या होगा?
ये सवाल आज सभी के ज़ेहन में है – अजित पवार के बाद महाराष्ट्र की सत्ता की दिशा किस ओर जाएगी? अजित पवार ने हमेशा अपने आक्रामक नेतृत्व और राजनीतिक सूझबूझ से राज्य की राजनीति को दिशा दी थी। उनके निधन के बाद ये असमंजस पैदा हो गया है कि क्या उनके समर्थक विधायक बिना किसी ठोस नेतृत्व के अपना मार्ग तय करेंगे या फिर उनका गुट एक बार फिर शरद पवार के पास लौटेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्य में अगला उपमुख्यमंत्री कौन होगा यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अगर हम वरिष्ठता के हिसाब से देखें तो छगन भुजबल का नाम सबसे आगे आ रहा है। भुजबल के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है और वह पहले भी उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ओबीसी समुदाय में उनकी गहरी पैठ महायुती के लिए आगामी चुनावों में एक मजबूत आधार साबित हो सकती है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या अजित पवार के वफादार विधायक भुजबल के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे या फिर अपनी राह अलग चुनेंगे?
शरद पवार निभा सकते हैं अहम भूमिका
यह स्थिति अजित पवार के गुट में शामिल विधायकों के लिए चुनौतीपूर्ण है। उनके निधन के बाद इन विधायकों के बीच असुरक्षा का माहौल बन गया है। अजित पवार वह ताकत थे जिन्होंने इन विधायकों को एकजुट रखा था और अब उनके बिना यह गुट किस दिशा में जाएगा यह सबसे बड़ा सवाल है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह गुट बिखर जाएगा या फिर शरद पवार एक बार फिर इस संकट की घड़ी में अपनी छांव में उन्हें एकजुट करेंगे।
सुनने में आ रहा है कि शरद पवार अपने अनुभव और नेतृत्व का इस्तेमाल करके अपनी पार्टी को फिर से मजबूती से खड़ा कर सकते हैं। पार्टी में ‘घर वापसी’ की संभावनाएं भी नजर आ रही हैं और अगर ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
पवार परिवार की राजनीति में एक और अहम नाम उभर रहा है – पार्थ पवार। हालांकि वह युवा हैं लेकिन बारामती के लोगों और अजित पवार के समर्थकों से उन्हें काफी समर्थन मिल रहा है। सवाल यह है कि क्या वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को सही तरीके से आगे बढ़ा पाएंगे? महाराष्ट्र की जटिल राजनीतिक स्थिति को देखते हुए उन्हें वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी।
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इस सिलसिले में प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं की भूमिका भी अहम हो सकती है। वे पार्टी के भविष्य को लेकर निर्णायक फैसले ले सकते हैं जो आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
महाराष्ट्र में शोक की लहर जारी
अजित पवार का कार्यकाल हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी कार्यशैली जैसे कि सुबह 7 बजे दफ्तर पहुंचना और तेजी से फाइलों पर निर्णय लेना उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को दर्शाता है। उनकी कमी सिर्फ उनकी पार्टी को नहीं बल्कि पूरी महायुती सरकार को महसूस होगी। उनका व्यक्तिगत योगदान राजनीति से अधिक मानवता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। उनके निधन से महाराष्ट्र शोक के गहरे सागर में डूबा हुआ है।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
आने वाले दिनों में यह सवाल अहम होगा कि महाराष्ट्र की सत्ता का केंद्र किस ओर झुकेगा। क्या छगन भुजबल को उपमुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया जाएगा या फिर शरद पवार एक बार फिर राजनीति की कमान अपने हाथ में लेंगे? यह स्थिति राज्य के आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाली है।
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प्रदेश की सियासत के अगले अध्याय में कौन सा नया चेहरा उभरेगा यह देखना दिलचस्प होगा। राजनीति के गलियारों में आने वाले बदलावों का असर न केवल राज्य की सत्ता पर बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ेगा।

