मिशन 2027: क्या प्रशांत किशोर की एंट्री से बदलेगा सपा का भाग्य, जानिए अंदर की पूरी रणनीति
मिशन 2027: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी तैयारी को तेज़ कर दिया है। 2027 में होने वाले चुनावों को लेकर सपा प्रमुख ने एक नई रणनीति अपनाई है जिसे लेकर पार्टी के भीतर एक नया उत्साह देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) को अपनी पार्टी के चुनावी प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रशांत किशोर का नेतृत्व: क्या बदलाव लाएगी उनकी रणनीति?
तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर एम.के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव को सलाह दी थी कि वे प्रशांत किशोर की कंपनी को अपने चुनावी अभियान में शामिल करें। इसके बाद अखिलेश ने दिल्ली और बंगाल में बैठकें कीं और अब खबर है कि 28 मार्च को नोएडा से उनके चुनावी अभियान की शुरुआत होगी। नोएडा में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा जिसे पीडीए भागीदारी रैली कहा जाएगा।
आईपैक को विशेष रूप से उन विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है जहां सपा पिछली बार कम अंतर से हार गई थी। इसके अलावा उम्मीदवारों के चयन जातिगत समीकरण और अन्य पहलुओं पर शोध करने के लिए भी इस टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अखिलेश की 2027 की रणनीति: एक बड़ा कदम या विफलता?
सपा के लिए 2027 का चुनाव एक निर्णायक पल साबित हो सकता है। 2012 के बाद से दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2017 और 2022 में सपा को सीटों में वृद्धि मिली मगर वह सरकार बनाने में सफल नहीं हो पाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 36 सीटें जीतीं जो अखिलेश यादव के लिए एक संकेत है कि 2027 में उनकी पार्टी सत्ता में वापसी कर सकती है।
अखिलेश यादव का मानना है कि 2027 में उनकी पार्टी को अभूतपूर्व जीत मिलेगी और इसके लिए वे पीडीए फार्मूले का अनुसरण कर रहे हैं। उनका दावा है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से बाहर कर देंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनावी आक्रामकता
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को चुनौती दी है और दावा किया है कि बीजेपी सरकार की नाकामियां खासकर कानून-व्यवस्था और प्रशासन के मोर्चे पर जनता के बीच मुद्दा बन रही हैं। उनका कहना है कि 2027 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए उत्तर प्रदेश की जनता ने पूरी तरह से सपा को समर्थन देना शुरू कर दिया है।
किसान और बुंदेलखंड पर ज्यादा फोकस
अखिलेश यादव ने अपने चुनावी अभियान में किसानों और विशेष रूप से बुंदेलखंड के किसानों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि जब भी समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तब किसानों की स्थिति सुधारने और उनकी फसल की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान किसानों को हमेशा प्राथमिकता दी गई थी और अखिलेश ने इस पर फिर से जोर दिया है।
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क्या 2027 में सपा सत्ता में वापसी कर पाएगी?
2027 के चुनावी परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। प्रशांत किशोर की टीम अब एक साल पहले ही इस चुनावी मिशन में जुट चुकी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस बार अखिलेश यादव को चीफ मिनिस्टर बना पाने में सफल होते हैं या नहीं। सपा प्रमुख के लिए यह चुनाव जीतने या हारने का मामला हो सकता है और उनका दावा है कि इस बार वे रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल करेंगे।

