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अयातुल्ला खामेनेई कौन हैं और जानें ईरानी सुप्रीम लीडर को क्यों खत्म करना चाहता है अमेरिका

News on us and iran war: हाल ही में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के विरुद्ध एक संयुक्त सैन्य अभियान की शुरुआत की है जिससे पश्चिम एशिया में एक और गंभीर संकट ने जन्म लिया है। तेहरान में कई धमाकों के बाद ये साफ हो गया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को पुष्टि करते हुए ईरानी नागरिकों से अपनी सरकार के विरुद्ध उठ खड़े होने की अपील की। अब सवाल यह है कि इस जटिल भू-राजनीतिक संकट का असर ईरान की जनता और मध्य एशिया की राजनीति पर क्या पड़ेगा?

तेहरान पर गिराई गई सात मिसाइलें

हालिया हमलों में ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई महत्वपूर्ण इलाकों को निशाना बनाया गया। इनमें वे क्षेत्र शामिल थे जो सीधे तौर पर अयातुल्ला खामेनेई से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सात मिसाइलें तेहरान के उत्तर में स्थित राष्ट्रपति भवन और खामेनेई के कार्यालयों के पास गिराई गईं। हालांकि खामेनेई इस वक्त तेहरान में मौजूद नहीं थे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। यह हमले अमेरिका और इज़राइल की रणनीति का हिस्सा हैं जो ईरान के नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

अयातुल्ला खामेनेई कौन हैं और अमेरिका उन्हे क्यों खत्म करना चाहता है

अली खामेनेई जो इस समय 86 वर्ष के हैं 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। वे उस समय पद पर काबिज हुए थे जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ। खुमैनी ने 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था जो एक नई राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण था। इस क्रांति ने शाह की सरकार को उखाड़ फेंका था। खामेनेई की ताकत ईरान के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों—सरकार सेना न्यायपालिका पर है और वे देश के आध्यात्मिक नेता भी माने जाते हैं।

अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता में रहते हुए ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्ते हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल के साथ उनका यह विरोध खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। खामेनेई का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांति के उद्देश्य से है लेकिन अमेरिका और इज़राइल का आरोप है कि ईरान छिपकर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।

ईरान के शक्तिशाली ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) और ‘बसीज’ अर्धसैनिक बलों के जरिए खामेनेई ने अपनी सत्ता को मजबूती से बनाए रखा है। यही वजह है कि वह अमेरिका और इज़राइल के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं।

अमेरिका और इज़राइल ने खामेनेई के विरुद्ध अपने रुख को और कड़ा कर लिया है। इज़राइली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने खुले तौर पर कहा है कि खामेनेई जैसे तानाशाह का अस्तित्व नहीं रह सकता। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी खामेनेई के विरुद्ध हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि उन्हें खामेनेई की ठिकाने की पूरी जानकारी है और वह अमेरिका के लिए आसान लक्ष्य हैं। इसके अलावा ट्रंप ने ईरानी जनता से सरकार के विरुद्ध आंदोलन करने की भी अपील की है।

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इन हमलों और सैन्य कार्रवाइयों का सबसे बड़ा असर ईरान की जनता पर पड़ सकता है। जहां एक ओर खामेनेई की सत्ता अब भी मजबूत बनी हुई है वहीं अमेरिकी और इज़राइली दबावों के चलते ईरान में आंतरिक विरोध और असंतोष बढ़ सकता है। कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और घरेलू विरोधों के बावजूद खामेनेई का शासन जारी है लेकिन अब समय आ गया है जब ईरान की जनता अपने भविष्य के बारे में गंभीर विचार कर सकती है।

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