Prince Yadav Struggle: एक ऐसा भारतीय क्रिकेटर जो बैन होने बाद भी छा गया
Prince Yadav Struggle: आईपीएल सिर्फ क्रिकेट लीग नहीं रहा बल्कि ये अब युवाओं के सपनों को नई दिशा देने वाला मंच बन चुका है। इसका ताजा उदाहरण हैं प्रिंस यादव, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से न केवल टीम में जगह बनाई बल्कि अपने गांव और आसपास के इलाकों में भी नई उम्मीद जगाई है। आज उनके घर पर लोगों की भीड़ लगती है और हर कोई उनकी सफलता का जश्न मनाता है।
प्रिंस यादव की संघर्ष भरी दास्तान
प्रिंस यादव का सफर आसान नहीं था। उनके पिता रामनिवास यादव, जो रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में एएसआई हैं चाहते थे कि उनका बेटा एक स्थिर नौकरी करे उनके जैसे पुलिस में भर्ती हो जाए। उन्हें चिंता होती थी क्योंकि प्रिंस का ध्यान सिर्फ टेनिस बॉल क्रिकेट तक सीमित था।
मगर प्रिंस ने अपने पिता को भरोसा दिलाया कि वह खुद कुछ बड़ा करेगा। यह आत्मविश्वास ही आगे चलकर उनकी पहचान बना।
क्रिकेट के प्रति जुनून ने बदली दिशा
18 साल की उम्र तक प्रिंस ने लेदर बॉल से क्रिकेट नहीं खेला था। उनके पिता ने उन्हें दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा दिलवाई। वह फिजिकल टेस्ट पास भी कर गए, मगर पढ़ाई में मन नहीं लगा क्योंकि उनका लक्ष्य अलग था।
आखिरकार पिता ने बेटे की इच्छा को समझा और उसका साथ देने का फैसला किया। सीमित आय के बावजूद उन्होंने प्रिंस को आगे बढ़ने दिया।
कोच और मेंटर्स का अहम योगदान
प्रिंस की प्रतिभा को सबसे पहले कोच अमित वशिष्ठ ने पहचाना। उन्होंने प्रिंस को टेनिस बॉल खेलते देखा और अपनी अकादमी में मौका दिया। इसके बाद अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनकी फिटनेस पर काम किया।
इन दोनों के मार्गदर्शन ने प्रिंस के खेल को नई दिशा दी।
दो साल का लग चुका है बैन
प्रिंस के करियर में एक समय ऐसा भी आया जब उम्र से जुड़ी गड़बड़ी के कारण उन पर दो साल का प्रतिबंध लग गया। यह समय कोविड के दौरान का था, जिससे परिवार काफी परेशान था। मगर प्रिंस ने हार नहीं मानी। उन्होंने घर पर ही जिम का सामान मंगवाया और लगातार अभ्यास करते रहे। इस मेहनत का परिणाम आज सबके सामने है।
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आज बना गांव की पहचान
आज प्रिंस यादव आईपीएल में लखनऊ की टीम के लिए खेलते हुए अपनी यॉर्कर गेंदों से पहचान बना रहे हैं। उनके प्रदर्शन के बाद गांव के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
पहले इस इलाके को लोग किसी और वजह से जानते थे, मगर अब यह क्रिकेट प्रतिभा के लिए पहचाना जा रहा है। प्रिंस की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे स्थानों से भी बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं।

