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Panchayat Election से पहले UP में आरक्षण आयोग का होगा गठन, जानें कब से शुरू होगी प्रक्रिया

उप्र में अगले साल होने वाले पंचायत इलेक्शनों को लेकर प्रशासन की तैयारियों में तेजी आ गई है (Uttar Pradesh Panchayat Election)। गांवों के नक्शे को नए सिरे से खींचने की कवायद पूरी होते ही अब आरक्षण तय करने की प्रक्रिया पर फोकस बढ़ गया है (New Delimitation, Panchayat Election Reservation Process)।

पंचायती राज विभाग ने इसी सिलसिले में एक बड़ा कदम उठाया है (Panchayati Raj Department)। जानकारी के मुताबिक, महकमे ने पिछड़ा वर्ग के लिए छह सदस्यीय आयोग बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है (Backward Classes Commission, UP Government Commission Formation)। माना जा रहा है कि आयोग के जरिए जनसंख्या के ताज़ा आंकड़े जुटाए जाएंगे और उसी के आधार पर ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायत तक हर स्तर की सीटों पर आरक्षण तय होगा (Social Class Census, Gram Panchayat Reservation, Panchayat Election Seat Reservation, Reservation Fixing Process)।

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दरअसल, इस बार हुए नए परिसीमन के बाद सूबे की लगभग 500 से ज्यादा ग्राम पंचायतें घट गई हैं (Gram Panchayat Number, New Delimitation)। पहले जहां कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 58 हजार के पार थी, अब वो घटकर करीब 57 हजार रह गई है। नए नक्शे के बाद अब हर पंचायत क्षेत्र में जनसंख्या का बैलेंस भी थोड़ा बदला है (Panchayat Area Population), ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि आरक्षण व्यवस्था को उसी के मुताबिक अपडेट किया जाए (Panchayat Election Reservation System)।

बैठक में प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद (Cabinet Meeting Panchayat Proposal)

सूत्र बताते हैं कि कैबिनेट की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही आयोग का गठन होगा और अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर जनसंख्या और सामाजिक वर्ग का ताजा आंकड़ा इकट्ठा करेगी (Backward Class Share)। फिर उसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य जैसी अलग-अलग सीटों पर किस वर्ग को कितना आरक्षण मिलेगा (Gram Pradhan Reservation, Area Panchayat Member Reservation, District Panchayat Member Reservation)।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता रहा तो अक्टूबर तक आरक्षण तय करने की कवायद पूरी हो सकती है। उसके बाद ही पंचायत चुनावों की तारीखों को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ होगा (Panchayat Election Date 2025, Panchayat Election Date Announcement)। फिलहाल संकेत यही हैं कि 2025 के अप्रैल-मई में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं (Three-tier Panchayat Election, Panchayat Election Preparation)।
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ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भी अपने-अपने गांवों में सीटों के आरक्षित होने या सामान्य होने को लेकर चर्चा में जुटे हैं (Politics in Panchayat Election, Politics of Villages)। खासकर पिछड़े वर्ग के कई समुदायों में आयोग के गठन की खबर से उम्मीदें बंधी हैं कि इस बार उनके हिस्से की भागीदारी को ज्यादा ठोस आधार मिलेगा।

विभागीय अधिकारी मानते हैं कि सही आंकड़ों के बिना आरक्षण में गड़बड़ी की गुंजाइश बढ़ जाती है, यही वजह है कि इस बार आयोग के जरिए जनसंख्या के लेटेस्ट डाटा पर ही सारा गणित टिका होगा।

हालांकि अभी यह तय नहीं है कि आयोग अपनी रिपोर्ट कब तक देगा, मगर इतना साफ है कि गांव की सरकार चुनने की ये पूरी प्रक्रिया हर बार की तरह इस बार भी गांव-गांव में राजनीति को नई हवा देने वाली है (UP Panchayat Election Update, Panchayat Election News, Panchayat Election New Guidelines, Panchayat Election Commission Report)।

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