हर जिले में खुलेगा गर्ल्स हॉस्टल, जानें कैसे और किसको होगा फायदा
women empowerment scheme: केंद्र सरकार ने अपना 15वां आम बजट पेश कर दिया है जिसमें विकास के साथ-साथ सामाजिक समावेशन पर जोर दिया गया है। इस बजट में महिलाओं को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है जो सीधे तौर पर शिक्षा और रोजगार से जुड़ा हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि देश के हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों की छात्राओं को राहत
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छात्राओं को मिलेगा जो पढ़ाई के लिए अपने जिले से बाहर जाती हैं। कई जिलों में अब तक गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा नहीं थी। इसके चलते लड़कियों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या फिर निजी कमरों में असुरक्षित माहौल में रहना मजबूरी बन जाता था। नए हॉस्टल बनने से उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिलेगा जिससे पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दिया जा सकेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रहने की समस्या खत्म होने से साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स जैसे विषयों में लड़कियों का रुझान बढ़ सकता है। अब तक आवास की कमी कई छात्राओं के लिए इन कोर्सों में दाखिले की राह में बाधा बनती थी। हॉस्टल की सुविधा मिलने से उच्च शिक्षा में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
2035 तक नामांकन 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने हायर एजुकेशन में छात्राओं के नामांकन को 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अभी ये आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत के आसपास है। सरकार का मानना है कि हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनने से ये लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी और शिक्षा में लैंगिक संतुलन मजबूत होगा।
कामकाजी महिलाओं के लिए भी खुलेगा नया रास्ता
ये योजना सिर्फ छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगी। दूसरे शहरों से नौकरी के लिए आने वाली महिलाओं को भी इन हॉस्टल में रहने की सुविधा दी जाएगी। इससे उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा और वे बेहतर रोजगार विकल्प चुन सकेंगी। खासकर छोटे शहरों और कस्बों से आने वाली महिलाओं के लिए ये सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
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बजट भाषण में वित्त मंत्री ने साफ किया कि इस वर्ष के बजट की प्राथमिकता समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण है। हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की योजना को इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है। ये पहल न केवल शिक्षा बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

