लखनऊ में सरकारी दफ्तर के गार्डन से चंदन का पेड़ चोरी, मचा हड़कंप
लखनऊ (Lucknow) के सरकारी दफ्तरों (government office) और संस्थानों में पेड़-पौधों (चंदन का पेड़) की चोरी (tree theft, plant theft) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (National Botanical Research Institute) के गार्डन से करीब 4 से 5 फीट लंबा चंदन का तना (sandalwood tree) काटकर चोर ले गए, जिससे संस्थान की संपत्ति (government property) को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इस घटना ने न सिर्फ यहां के कर्मचारियों में चिंता बढ़ाई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
चंदन जैसे कीमती और औषधीय महत्व वाले पेड़ों (medicinal trees) की चोरी कई बार सामने आ चुकी है। इससे पहले केजीएमयू (KGMU) परिसर से भी इसी तरह के चंदन के वृक्ष चोरी होने की घटना दर्ज हुई है। यह लगातार बढ़ती चोरी की घटनाएं (incidents of theft) सरकारी सुरक्षा व्यवस्था और पेड़ों की सुरक्षा (protection of trees) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रही हैं।
हजरतगंज थाने में केस दर्ज
हजरतगंज थाने (Hazratganj police station) में इस चोरी की प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस मामले की जांच (police investigation) कर रही है। लेकिन इस तरह की घटनाएं पर्यावरणीय संतुलन (environmental balance) के लिए खतरा हैं क्योंकि चंदन का पेड़ संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परिसर में लगे पेड़ों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि प्राकृतिक संपदा (natural wealth) को बचाया जा सके। साथ ही आम जनता में भी पेड़-पौधों की अहमियत को लेकर जागरूकता (awareness) बढ़ानी होगी ताकि इस तरह की चोरी पर अंकुश लगाया जा सके।
नतीजा यह कि सरकारी संपत्तियों से पेड़ चोरी की बढ़ती घटनाएं न केवल संस्थानों की छवि को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी कमजोर कर रही हैं। अब सवाल यह है कि प्रशासन (administration) इस समस्या से निपटने के लिए क्या प्रभावी रणनीति अपनाएगा।


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