Dhadak 2 Movie Review: दलित लड़के की प्रेम कहानी, जानें फिल्म की स्टोरी
Dhadak 2 Movie Review: 1 अगस्त को सिनेमाघरों में ‘धड़क 2’ (Dhadak 2, Movie Release, 1 August) रिलीज हुई। ये एक फिल्म ही नहीं बल्कि सामाजिक बहस (Social Debate) का हिस्सा भी है। सिद्धांत चतुर्वेदी (नीलेश) (Siddhant Chaturvedi, Nilesh) और त्रिप्ती डिमरी (विधि) (Tripti Dimri, Vidhi) अभिनीत यह फिल्म तमिल मूल की विशेष रूप से परियेरुम पेरुमल (B.A.B.L.) (Pariyerum Perumal, Hindi Remake) का रीमेक है, जिसने जातिगत असमानताओं (Caste Inequality) को बेबाक तरीके से पर्दे पर उतारा था।
देखने वालों पर क्या असर पड़ेगा
ये फिल्म मुख्यतः उन लोगों की आवाज़ है जिनकी जिंदगी जातिगत भेदभाव (Caste Discrimination) से प्रभावित होती है। निचली जाति के संघर्ष (Dalit Struggle) से जुड़े दृश्य न केवल भावनात्मक (Emotional Story) रूप से झकझोरते हैं, बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर भी करते हैं कि समाज में अभी भी कौन-सी बाधाएं मौजूद हैं। इस वजह से फ़िल्म सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करने का जरिया बन सकती है।
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फिल्म कहानी क्या है
कथा की शुरुआत होती है जब नीलेश एक शादी समारोह में ड्रम बजा रहा है, जहाँ विधि उससे प्रभावित होती है। यह मुलाक़ात एक आकस्मिक पल लगता है, लेकिन बहुत जल्दी यह स्पष्ट हो जाता है कि नीलेश एक दलित युवक है, भोपाल के भीम नगर (Bhopal Bhim Nagar) से आता है और अपनी माँ के सपने को पूरा करने के लिए लॉ कॉलेज (Law College) में दाख़िला लेता है। यही से कहानी का सामाजिक संघर्ष (Social Struggle) शुरू होता है: मान‑सम्मान के लिए लड़ना, पहचान के लिए प्रयास करना और सीमित संसाधनों में अपने परिवार की उम्मीदों को चिराग की तरह जलाए रखना।
रिश्ते की जटिलता और सामाजिक दबाव
विधि ऊंची जाति (Upper Caste) से आती है; उसके परिवार में कई वकील हैं, जो पारिवारिक संरचनाओं और जातीय विभाजन (Caste Divide) में गहरे विश्वास रखते हैं। इसके बावजूद, विधि और नीलेश (Vidhi and Nilesh) के बीच प्यार (Love Story, Love Affair) पनपता है, जिसमें एक तरफ़ भावना और दूसरी तरफ़ सामाजिक विरोध (Social Protest) दोनों दृष्टिपात करते हैं। यह फिल्म बताती है कि प्रेम‑सम्बन्ध सिर्फ दिल से नहीं बनते, बल्कि बाहरी दबाव (Family Pressure), परिवार और सामाजिक संरचना भी इसमें गहराई से शामिल होती है। दूसरी ओर, विधि का परिवार खासकर उसका चाचा और चचेरे भाई रिश्ते को स्वीकार नहीं करना चाहते जिससे ये जंग और तीव्र होती जाती है।

