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कटेगा टिकट; नीतीश ने अपनाया BJP वाला फॉर्मूला, टेंशन में कई विधायक

बिहार की सियासत (Bihar politics) में बड़ा बदलाव आने की आहट सुनाई दे रही है। आगामी assembly elections 2025 में सी.एम Nitish Kumar के नेतृत्व में NDA एक बार फिर सत्ता में वापसी की तैयारी कर रहा है, मगर इस बार फोकस नीतियों से ज़्यादा चेहरों पर होगा खासकर उन चेहरों पर जो दशकों से विधानसभा में दिखते रहे हैं। अब सवाल ये है कि क्या old leader यानी उम्रदराज नेताओं को assembly ticket से वंचित कर young leader सामने लाए जाएंगे?

युवा नेताओं को बढ़त देने की तैयारी

सूत्रों की मानें तो BJP और JDU इस बार उम्मीदवारों के चयन में age limit को एक अहम मानदंड बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। BJP policy के तहत पार्टी पहले ही 70 पार नेताओं को पीछे करने की रणनीति (political strategy) पर काम कर चुकी है और अब JDU भी इसी राह पर बढ़ती दिख रही है। इस बदलाव का सीधा असर उन senior leader पर पड़ेगा जो दशकों से सक्रिय राजनीति में हैं, मगर अब उम्र के कारण पार्टी की प्राथमिकता से बाहर हो सकते हैं।

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70 पार विधायकों की सूची बनी चिंता का कारण

NDA में ऐसे कई विधायक हैं जिनकी उम्र 70 साल या उससे अधिक है। JDU candidate और senior leader Bijendra Prasad Yadav जल्द ही 80 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा ललित नारायण मंडल (75), मदन सहनी (73), मनोज यादव, जितेंद्र कुमार राय और अचमित ऋषिदेव जैसे नेता भी इस आयु सीमा में आते हैं। BJP के भी कई अनुभवी नेता इस श्रेणी में हैं जिनमें Arun Kumar Sinha और Ram Narayan Mandal जैसे नाम शामिल हैं।

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क्या रणनीति बदलेगी Bihar elections की तस्वीर (Bihar politics)

अगर यह leader change policy और age limit आधारित रणनीति लागू होती है तो JDU और BJP दोनों को अपने कुछ old leader की जगह नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारना पड़ेगा। इससे जहां youth in politics को अवसर मिलेगा वहीं वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे नेताओं को किनारे किया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दांव जोखिम भरा भी हो सकता है—एक ओर इससे पार्टी में नई ऊर्जा आएगी, वहीं दूसरी ओर senior leader और उनके समर्थकों में नाराज़गी की भी आशंका है।

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जमीनी हकीकत और seat wise survey का दबाव

चुनाव से पहले किए गए seat wise survey और voter trends रिपोर्ट्स के अनुसार कई सीटों पर मतदाता बदलाव के मूड में हैं। ऐसे में BJP और JDU के सामने चुनौती है कि वो स्थानीय समीकरणों और जनभावनाओं को समझते हुए ticket distribution करें। assembly ticket policy में performance और age limit दोनों को आधार बनाकर टिकट देने की संभावना जताई जा रही है।

NDA strategy: पुराने फॉर्मूले की वापसी

BJP इससे पहले महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में भी senior leader के टिकट काट चुकी है और उसे अच्छे नतीजे मिले हैं। ऐसे में Bihar elections में भी पार्टी उसी रणनीति को दोहराने का मन बना सकती है। JDU भी शायद इसी राह पर चलते हुए संकेत दे रही है कि पार्टी को young leader और JDU candidate के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

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