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टोटी चोरी पर गरमाई राजनीति, योगी का तंज; अखिलेश ने दिया तगड़ा जवाब

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक पुराना विवाद फिर से सुर्खियों में है। 9 साल पुराना ‘चोर विवाद’ इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच नई सियासी लड़ाई का रूप ले चुका है। आम जनता के नजरिए से यह सवाल उठता है कि राजनीतिक बयानबाजी के बीच उनके रोजमर्रा के मुद्दों पर कब ध्यान जाएगा।

हर घर नल योजना और विवाद

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण और हर घर नल योजना पर बात की। उन्होंने इस योजना से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार हर घर नल योजना के जरिए लोगों के घरों तक पानी पहुंचा रही है। लेकिन कुछ लोग चुरा ले जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे सीधे अखिलेश यादव से जोड़ा जाने लगा।

अखिलेश यादव का तेज़ पलटवार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सीएम के बयान पर हमला किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के पहले के जीवन का जिक्र करते हुए राजनीतिक तौर पर माहौल और गर्म कर दिया। उनका कहना था कि यह आरोप निराधार हैं और राजनीति में इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

‘टोटी चोर विवाद’ का इतिहास

यह विवाद नया नहीं है। 2017 में सपा की सरकार के जाते ही मुख्यमंत्री आवास से टोटी चोरी के आरोप लगे थे। बीजेपी ने इस मुद्दे को खूब उछाला था, जबकि सपा ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। इसके बाद भी यह शब्द यूपी की राजनीति में समय-समय पर सुनाई देता रहा।

कुछ महीने पहले भी अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया था और कहा था कि भविष्य में यदि उनकी सरकार बनी तो कुछ लोगों को प्रदेश छोड़ना पड़ सकता है। अब सीएम योगी के हालिया बयान के बाद यह पुराना विवाद फिर से गर्म हो गया है।

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राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आएगा, बीजेपी और सपा के बीच बयानबाजी और तेज होगी। आम लोग इस सियासी जंग को देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि शिक्षा, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मूलभूत मुद्दों पर कब चर्चा होगी।

उत्तर प्रदेश की जनता फिलहाल यह देखने में लगी है कि राजनीति कब अपने असली मुद्दों पर लौटेगी या सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का खेल चलता रहेगा।

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