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26 जुलाई तक महा अलर्ट जारी, इन राज्यों में रहते हैं तो हो जाए सावधान

देशभर में मानसून ने अब अपनी पूरी ताकत से वापसी कर ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक वृहद अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि 26 जुलाई तक देश के विशाल हिस्से में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने वाला है।

विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मैदानी राज्यों में जहां जलभराव की स्थिति बन सकती है, वहीं पहाड़ी इलाकों के लिए मौसम विभाग ने गंभीर आपदा संबंधी चेतावनियाँ जारी की हैं।

पहाड़ों पर कुदरत का कहर: हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बादल फटने व भूस्खलन की चेतावनी

मौसम विभाग ने पहाड़ी राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील चेतावनी जारी की है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में बादल फटने (Cloudburst), अचानक बाढ़ (Flash Floods) और भयानक भूस्खलन (Landslides) जैसी घटनाओं का तीव्र जोखिम बना हुआ है। आईएमडी ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी नदी-नालों से दूर रहने और यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है।

दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार में 26 जुलाई तक झमाझम: जानिए मैदानी राज्यों का हाल

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) रेखा का रुख दक्षिण की ओर खिसकने के कारण मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां चरम पर हैं:

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले तीन से चार दिनों तक लगातार भारी बारिश होगी।

मध्य व पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में अगले 48 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश का अनुमान है।

तटीय व पूर्वोत्तर राज्य: मुंबई, तटीय महाराष्ट्र, कर्नाटक के समुद्री तट और पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) राज्यों में भी मूसलाधार बारिश की निरंतरता बनी रहेगी।

देश के 80% हिस्से में वर्षा दर्ज: क्यों अचानक इतना आक्रामक हुआ मानसून?

बीते 24 घंटों के दौरान भारत के लगभग 80% भौगोलिक क्षेत्र में बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) राजस्थान के गंगानगर से रोहतक, सुल्तानपुर होते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके साथ ही झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक साथ कई चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulations) सक्रिय हैं। इन सभी मौसमी प्रणालियों के एक साथ जुड़ने से पूरे देश में बारिश का दायरा तेजी से फैल गया है।

23 जुलाई के बाद बदलेगी तीव्रता, लेकिन खेती के लिए वरदान साबित होगी बारिश

जून महीने में देश भर में सामान्य से लगभग 40% कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, 23 जुलाई के बाद बारिश की तीव्रता में आंशिक कमी आ सकती है, लेकिन उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। केवल पश्चिमी राजस्थान और दक्षिण भारत के कुछ अंदरूनी हिस्सों में बारिश अपेक्षाकृत कम हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस मानसूनी स्पेल से बारिश का घाटा पूरा होगा और खरीफ फसलों को नया जीवन मिलेगा।

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