वर्ल्डहोम

एक फ्रेम में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग; SCO की तस्वीरों ने क्यों बढ़ाई ट्रंप की टेंशन

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से सामने आईं तस्वीरों और वीडियो ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दिखी गर्मजोशी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

दुनिया के तीन शीर्ष नेताओं का यह मेल-मिलाप अमेरिकी नेतृत्व और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए रणनीतिक असहजता का कारण बन सकता है। चीन और रूस के साथ अमेरिका के बेहद तनावपूर्ण संबंधों के बीच, भारत का दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के शीर्ष नेताओं के साथ तालमेल यह साफ संदेश देता है कि नई दिल्ली अपनी विदेश नीति किसी तीसरे देश के दबाव में तय नहीं करती।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी माना भारत का बढ़ता प्रभाव

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन की सराहना की है। इसके साथ ही विश्लेषण में यह चिंता भी जताई गई है कि भारत धीरे-धीरे पश्चिमी प्रभाव के दायरे से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। एससीओ मंच पर भारत की यह सक्रियता दिखाती है कि देश अपनी सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से कोई समझौता नहीं करेगा।

ईरानी राष्ट्रपति से वार्ता और अमेरिकी धमकियों को दरकिनार कर व्यापार बढ़ाने का संकल्प

अमेरिका लंबे समय से ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अन्य देशों को भी उससे व्यापार न करने की चेतावनी देता रहा है। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से औपचारिक मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार व सहयोग को और अधिक विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए संबंध विकसित करेगा और किसी भी महाशक्ति के दबाव में अपनी रणनीतिक साझेदारियों को सीमित नहीं करेगा।

अमेरिका से मजबूत संबंध भी बरकरार, रणनीतिक संतुलन की मिसाल

भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि ईरान, रूस या चीन के साथ बातचीत का अर्थ अमेरिका के विरोध में खड़ा होना कतई नहीं है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, आधुनिक तकनीक, विदेशी निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी का दायरा बेहद गहरा और अटूट है। भारत की नीति किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय बहुध्रुवीय विश्व में संतुलन साधने की है।

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आतंकवाद पर सख्त प्रहार, पाकिस्तान को मंच पर किया नजरअंदाज

एससीओ शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार आतंकवाद पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए इसकी तीखी निंदा की। सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पूरी तरह नजरअंदाज कर भारत ने यह साफ कर दिया कि आतंकवाद और सामान्य कूटनीतिक संवाद एक साथ नहीं चल सकते। कुल मिलाकर, बिश्केक में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के जरिए भारत ने स्वतंत्र विदेश नीति का सशक्त प्रदर्शन करते हुए एक साथ कई भू-राजनीतिक मोर्चों पर बढ़त हासिल की है।

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