पंचायत सहायकों का योगी सरकार को अल्टीमेटम, अगर माँगों को नहीं किया गया पूरा तो अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन की चेतावनी
EELA INDIA NEWS
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 का काउंट डाउन शुरू हो गया है। इसी बीच प्रदेश के पंचायत सहायकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर योगी सरकार के सामने मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन की तरफ से प्रत्येक जनपद में अपनी समस्याओं और मांगों के संबंध में जनपद स्तर से मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन दिया जा रहा है।
इसी क्रम में जनपद सुलतानपुर में पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जनपद मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपा। संगठन के जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में पंचायत सहायकों ने मानदेय वृद्धि एवं नियमितीकरण समेत अन्य समस्याओं के बारे में बताया।
7 सितम्बर 2026 से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना
पंचायत सहायकों ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि आगामी 7 सितम्बर 2026 तक यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक आदेश जारी नहीं किया जाता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। उनका कहना है कि आगामी 7 सितम्बर से प्रदेश भर के समस्त पंचायत सहायक राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में आंदोलन की शुरुआत धरना-प्रदर्शन से होगी और जरूरत पड़ने पर इसे अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील किया जाएगा।
कौन है पंचायत सहायक?
पंचायत सहायक ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य करने वाला एक स्थानीय कर्मचारी होता है, जो ग्रामीणों और पंचायत प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है। पंचायत सहायक का प्रमुख कार्य ग्राम पंचायत से जुड़े सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन सेवाओं, दस्तावेजी कार्यों और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में सहयोग करना है।
पंचायत सहायक ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, ऑनलाइन आवेदन एवं रिकॉर्ड संबंधी कार्यों में मदद करने तथा पंचायत के कामकाज को डिजिटल रूप से संचालित करने में भी सहयोग करता है। ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में पंचायत सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
क्या हैं पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगें
पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन की तरफ से प्रत्येक जनपद में सौंपे जा रहे ज्ञापन के अनुसार पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं –
1. प्रतिनिधिमंडल की सीएम से मुलाकात
पंचायत सहायकों की मांग है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करें और उनकी समस्याओं को सुनकर सकारात्मक आदेश जारी करें।
2. न्यूनतम कुशल मजदूरी दर के बराबर मानदेय
उनकी दूसरी प्रमुख मांग है की पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष ₹30,000 प्रतिमाह किया जाए या तो कम से कम उत्तर प्रदेश में निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी दर के बराबर मानदेय प्रदान किया ही जाए। गौरतलब है कि वर्तमान में पंचायत सहायकों के लिए वर्तमान में ₹ 6,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जा रहा है। इसका भुगतान ग्राम पंचायत की निधि से किया जाता है।
3. स्थायी सेवा नियमावली एवं राज्य कर्मचारी का दर्जा
पंचायत सहायकों की तीसरी प्रमुख मांग है कि उनकी वर्तमान में प्रचलित अनुबंध/संविदा प्रक्रिया को समाप्त किया जाए। साथ ही स्थायी सेवा नियमावली बनाते हुए राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
4. मातृत्व अवकाश की समेत अन्य सुविधाएँ
गौरतलब है पंचायत सहायकों में ज्यादा संख्या महिला पंचायत सहायकों की है। इसलिए मातृत्व अवकाश की सुविधा प्रदान की जाए तथा उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शादी या विवाह के उपरांत या अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण/समायोजन की नीति लागू की जाए। साथ ही उनकी मांग है कि पंचायत सहायकों को प्रशिक्षण के लिए यात्रा भत्ता व अन्य भत्ता प्रदान किया जाए।
हालांकि सरकार की तरह से जारी शासनादेश में में यह बात कही गई कि पंचायत सहायकों को ग्राम पंचायत में कार्य करने कार्य के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी।
5. पदोन्नति में क्षैतिज आरक्षण प्रदान
पंचायत सहायकों के अनुभव एवं कार्य को ध्यान में रखते हुए आगामी ग्राम विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाए।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत सहायकों की यह घोषणा सरकार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों की समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।
पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने का दावा किया है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई न होने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पंचायत सहायकों ने सरकार से अपील की है कि आंदोलन की स्थिति पैदा होने से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन सुचारु रूप से कर सकें।

