“हम मजबूरी में पीएम आवास गए…” संसद में अखिलेश यादव का रौद्र रूप, छात्रों के समर्थन में बीजेपी को घेरा
संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट (NEET) और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच अभूतपूर्व तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने संसद में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार और आसन पर गंभीर सवाल खड़े किए। संसद भवन के भीतर हुए इस भारी हंगामे और दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध के चलते लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही अपराह्न 2:00 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
‘यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, युवाओं के भविष्य का है’
अखिलेश यादव ने अपनी बात रखने का मौका न दिए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सत्ता पक्ष और आसन को संबोधित करते हुए कहा, “अध्यक्ष महोदय! यह मुद्दा कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या बीजेपी का नहीं है। यह मुद्दा देश के करोड़ों युवाओं और छात्र-नौजवानों का है।”
अखिलेश यादव ने अन्य नेताओं को बोलने का समय देने और विपक्ष को रोके जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के अधिकारों की लड़ाई कोई व्यक्तिगत या दलीय राजनीति नहीं है।
‘छात्रों के हाथ तोड़े, सिर फोड़े और बेटियों के कपड़े फाड़े’
सड़कों पर हुए छात्र प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जब देश के छात्र-नौजवानों की बात नहीं सुनी जाएगी, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। सरकार ने उनके साथ जो व्यवहार किया है, वह शर्मनाक है। हमारे युवा साथियों के हाथ तोड़े गए, सिर फोड़े गए और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। क्या आप देश की बेटियों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे?
अखिलेश ने स्पष्ट किया कि विपक्ष मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने गया था। उन्होंने कहा, “अगर आप संसद के भीतर हमारी बात सुन लेते, तो हमें सड़कों पर या पीएम आवास पर नहीं जाना पड़ता। जब प्रधानमंत्री बाहर बोल सकते हैं, तो वे सदन में आकर युवाओं के लिए अपना आधिकारिक बयान क्यों नहीं दे सकते?”
‘इस्तीफा तो जब चाहेंगे तब ले लेंगे’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर चुटकी लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस्तीफा देना कोई बड़ी बात नहीं है, मंत्री का इस्तीफा तो जब चाहेंगे तब सदन के बाद भी ले लिया जाएगा, लेकिन असली सवाल यह है कि छात्रों के साथ जो हिंसा हुई है, उसकी जवाबदेही कौन लेगा?
अध्यक्ष की अपील: ‘सरकार खुले मन से चर्चा को तैयार, नियम तय कीजिए’
सदन में लगातार बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने हस्तक्षेप करते हुए विपक्षी सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की।
अध्यक्ष ने कहा, “माननीय सदस्यगण, आप सभी के मत आ चुके हैं। आप भी चर्चा चाहते हैं और सरकार भी खुले मन से चर्चा करने को पूरी तरह तैयार है। किस नियम के तहत चर्चा करनी है और कितनी देर करनी है, यह सब तय करने के लिए आप बैठिए। ऐसे गैलरी और वेल में आकर नारेबाजी करने से चर्चा नहीं होगी।”
अध्यक्ष ने आगे कहा कि विपक्षी दलों के आपस के विवाद या गतिरोध को वे आसन पर बैठकर नहीं सुलझा सकते। लगातार होते शोर-शराबे और अव्यवस्था को देखते हुए अध्यक्ष ने अंततः सदन की कार्यवाही को अपराह्न 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

