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तीसरे विश्व युद्ध की घंटी? 4 बड़े देश आपस में भिड़े, आसमान से बरस रही है मौत

शांति, सौहार्द एवं खुशहाली का माहौल कायम रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, मगर दुनिया आज इससे कोसों दूर नजर आती है। अब देखिए ना एक तरफ अमेरिका-ईरान और दूसरी ओर पाकिस्तान-अफगानिस्तान एक बार फिर आपस में भिड़ गए हैं। चारों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ सख्त एवं हमलावर रुख अपना लिया है। कुछ दिन की शांति के बाद खून-खराबे का नया दौर शुरू हो गया है।

इन मुल्कों में अमन-चैन दांव पर

हमला ड्रोन से हो या मिसाइलों से, गोलियां बंदूक से चलाई जाएं या स्वचालित हथियारों से, निशाने पर अक्सर बेकसूर नागरिक भी होते हैं। उन पर मौत का झपट्टा कभी आसमान से पड़ता है तो कभी जमीन से। बात चाहे अमेरिका की हो, ईरान की, पाकिस्तान या अफगानिस्तान की, सच्चाई यह है कि चंद ताकतवर शख्सियतों के अहंकार ने इन मुल्कों में अमन-चैन को दांव पर लगा रखा है।

युद्ध मैदान में अमेरिका का घमंड चूर-चूर होने के बाद भी बार-बार सामने आ रहा है। ईरान बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है, मगर वह झुकने या पीछे हटने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान में जनता को खाने के लाले पड़े हैं, मगर मुनीर सेना निर्दोषों पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने में लगी है। अफगानिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर है। फिर भी तालिबान की सरकार मूंछों पर ताव देने से बाज नहीं आ रही है। अमेरिका और ईरान की अदावत नई नहीं है। लंबे समय से तेहरान को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

वाशिंगटन का इरादा तेहरान में अपनी हुकूमत चलाने का है। ताजा विवाद अमेरिकी लड़ाकू विमान को ईरान द्वारा निशाना बनाने के बाद सामने आया है। आसमान में विमान नष्ट होने से बौखलाए अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले करने में देरी नहीं की है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इसके चलते मिडिल ईस्ट में तनाव पुन: बढ़ चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अभी तक तेहरान का कब्जा है। अमेरिका की तमाम चेतावनियों को ईरान ने नजरअंदाज कर रखा है। मौजूदा तनाव ने युद्ध विराम के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

दर्जनभर से अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत

उधर, पाकिस्तानी सेना के हमले में अफगानिस्तान में दर्जनभर से अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत होने से तनाव चरम पर है। तालिबान सरकार ने बदला लेने की धमकी दी है। इस बीच एक महत्वपूर्ण सवाल चर्चाओं में है। आखिर अमेरिका-ईरान के मध्य जब-जब तनाव बढ़ता है उसी दौरान इस्लामाबाद अचानक अफगानिस्तान के प्रति आक्रामक क्यों हो जाता है? जानकारों का मानना है कि इसके पीछे पाकिस्तान की सोची-समझी रणनीति है। दरअसल अमेरिका चाहता है कि इस्लामाबाद जंग में उसका साथ दे।

ऐसे में खुद को जंग में घिरा दिखाकर वह इस लड़ाई से अलग रहने की कोशिश करता है। वहीं, रूस और यूक्रेन में तनाव पुन: बढ़ रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका बनाम ईरान युद्ध से विभिन्न देश बुरी तरह प्रभावित हैं। युद्धकाल को सौ दिन से अधिक हो चुके हैं। इस दरम्यान डीजल-पेट्रोल और रसोई गैस के दाम बढ़ने से अन्य उपभोक्ता वस्तुएं भी महंगी हो चुकी हैं।

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आम आदमी की कमाई में कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसलिए इस लड़ाई को रोकना जरूरी हो गया है। सक्षम देशों को आगे आकर दोनों पक्षों को युद्ध से पीछे हटने के लिए राजी करना होगा। अन्यथा आम आदमी का भविष्य अंधकार की तरफ जा रहा है। यह काम प्राथमिकता के साथ होना चाहिए।

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