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ट्रंप की एक जिद और तबाह हो जाएंगे ये मुस्लिम देश, जानिए अमेरिका ने क्या मांग लिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ मुस्लिम देशों को असमंजस में डाल दिया है। ईरान के साथ टकराव से इतर ट्रंप की नई मंशा को जानकर वह मुश्किल में आ गए हैं। ये देश वाशिंगटन की नाराजगी भी झेलना नहीं चाहते हैं। यदि वे ट्रंप की बात मान लेते हैं तो उन्हें घर में बखेड़ा होने का डर है। मसलन नाराज जनता सड़कों पर उतर सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे मुल्कों पर इजरायल के साथ अब्राहम अकॉर्ड साइन कर लेने का दबाव डाला है।

ट्रंप की टेंशन क्यों बढ़ी

ट्रंप ने इस सिलसिले में संबंधित देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बातचीत की है। अब्राहम अकॉर्ड का सीधा मतलब है कि ये देश इजरायल को एक राष्ट्र के तौर पर मान्यता प्रदान करें। उसके साथ उन्हें राजनायिक रिश्ते कायम करने होंगे। ट्रंप के प्रस्ताव ने इन देशों के माथे पर चिंता की लकीरें उभार दी हैं। ये देश अक्सर इजरायल के खिलाफ खड़े नजर आते हैं। खासकर पाकिस्तान और इजरायल के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर इजरायल जाने की इजाजत तक नहीं है। अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ने का फैसला प्रत्येक देश के राष्ट्राध्यक्ष को लेना है।

पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों में आम जनता इजरायल को मुस्लिमों को सबसे बड़ा दुश्मन मानती है। ट्रंप के प्रस्ताव को मानने की सूरत में इन मुल्कों में आंतरिक हालात विस्फोटक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। चूंकि जनता विद्रोह कर सकती है। डोनाल्ड ट्रंप का फोकस सऊदी अरब और इजरायल के रिश्ते सुधारने पर है। इजरायल-हमास जंग आरंभ होने से पहले तक इसकी संभावना भी नजर आ रही थी, मगर जंग छिड़ने के बाद सऊदी ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।

पिछले साल नवंबर में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बैठक के दौरान भी ट्रंप यह मुद्दा उठाया था। जिसकी वजह से दोनों नेताओं में गहमागहमी भी हो गई थी। सऊदी अरब का कहना है कि इजरायल से रिश्ते सामान्य तभी होंगे जब वह फिलिस्तीन को अलग देश बनाने के लिए पक्का प्लान माने, इजरायल इसके लिए तैयार नहीं है। उधर, फिलिस्तीन का मुद्दा पाकिस्तान की जनता के लिए बेहद संवेदनशील मसला है। ऐसे में फिलिस्तीन पर कोई साफ रुख लिए बिना इजरायल को आधिकारिक मान्यता देना पाकिस्तान में बारूद के ढेर पर चिंगारी लगाने जैसा हो सकता है।

पाक रक्षा मंत्री ने भी दिखाई आंख

इस्लामाबाद ने ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने ने बयान दिया है कि इस्लामाबाद ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेगा, जो इजरायल को लेकर देश की बुनियादी विचारधारा के खिलाफ हो। ईरान ने भी समझौतों में शामिल होने के किसी भी सुझाव को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। सऊदी अरब व पाकिस्तान जैसे देश अमेरिका को नाराज भी नहीं करना चाहते हैं। खासकर पाकिस्तान को फिलवक्त सबसे बड़ा सहारा वाशिंगटन का है।

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कर्ज में डूबे इस मुल्क को नया कर्ज मिलना यदि बंद हो गया तो अर्थव्यवस्था गर्त में चली जाएगी। महंगाई बढ़ने पर जनता उग्र होगी। इन परिस्थितियों में शहबाज सरकार के समक्ष गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ईरान के साथ समझौता होने पर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को तुरंत ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल हो जाना चाहिए। इसके बाद दूसरे मुस्लिम देशों को भी इससे जुड़ना चाहिए। उन्होंने यह तक कहा कि आगे चलकर खुद ईरान भी इसका हिस्सा बन सकता है।

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