2 देश, 80 मौतें और चारों तरफ चीख-पुकार! क्या दुनिया में आ गई एक और महाविनाशकारी बीमारी
2 देश और 80 मौतें…। जी हां ! इबोला नामक बीमारी अब दुनिया भर में खौफ का नया कारण बन रही है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला ने मौत का तांडव मचा रखा है। घर-घर में दहशत का आलम है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में अफरा तफरी मची है। कांगो व युगांडा की मौजूदा सरकारों के हाथ-पांव फूल रहे हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं, मगर हालात काबू में नहीं आ पाए हैं। इबोला के बढ़ते प्रकोप एवं खौफ को देखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को मैदान में उतरना पड़ा है।
WHO ने घोषित कर दिया है इमरजेंसी
डब्ल्यूएचओ ने इबोला को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। इसका मतलब यह बीमारी वाकई बेहद गंभीर है। इबोला वायरस से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोऑर्डिनेशन की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि प्रकोप की गंभीरता और फैलाव को समझा जा सके। फिलहाल भारत के संबंध में कोई अलर्ट नहीं आया है। इसके बावजूद सतर्कता बरते जाने की जरूरत है। इबोला वायरस एक अत्यधिक घातक और संक्रामक वायरस है, जो इंसानों और अन्य प्राइमेट्स में गंभीर ‘वायरल हेमोरेजिक फीवर’ (रक्तस्रावी बुखार) का कारण बनता है। इसके संक्रमण में मृत्यु दर काफी अधिक होती है।
इस घातक बीमारी के प्रमुख लक्षणों को जानने की भी जरूरत है। तेज बुखार और अत्यधिक थकान, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों और पेट में दर्द, उल्टी-दस्त और भूख न लगना, नाक, मुंह और मसूड़ों से खून आना, त्वचा पर चकत्ते और आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके इलाज के लिए एंटीवायरल दवाएं और मरीज के शरीर में तरल पदार्थों का स्तर बनाए रखने जैसी सहायक चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। इबोला मूल रूप से जानवरों की बीमारी है, जो इंसानों में आ गई है।
ऐसे फैलता है ये वायरस
माना जाता है कि कुछ खास तरह के चमगादड़ इस वायरस को अपने अंदर लेकर चलते हैं। जब कोई इंसान संक्रमित जानवर के खून या शरीर के किसी भी तरल पदार्थ के संपर्क में आता है, तो यह बीमारी उसे जकड़ लेती है। अच्छी बात यह है कि जब तक मरीज में बीमारी के लक्षण न दिखें, तब तक वह वायरस नहीं फैला सकता। इबोला का वायरस शरीर में प्रवेश के बाद अपना असर दिखाने में दो से इक्कीस दिन का समय ले सकता है। आज जब इस नए ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन की कोई दवा नहीं है, तो बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। इबोला का असर क्या धीरे-धीरे पूरी दुनिया में बढ़ सकता है?
अभी ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि हाथ पर हाथ रखकर बैठने से काम नहीं चलेगा। छह से सात साल पहले दुनिया ने कोरोना वायरस का तांडव देखा था। कोरोना संक्रमण के कारण असंख्य नागरिकों को जान गंवानी पड़ी थी। नागरिकों को लॉकडाउन जैसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। एक अदृश्य वायरस ने न सिर्फ मौत का खेल खुलकर खेला था बल्कि प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को बेपटरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कोरोना वायरस इंसान से इंसान में फैलने के कारण तेजी से बढ़ा था।
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अलबत्ता इबोला को सिर्फ कांगो और युगांडा का संकट समझ कर भूल जाना समझदारी नहीं होगी। इससे बचने के लिए भारत सरकार को पहले से सतर्कता बरतनी होगी। चूंकि मुसीबत यदि दरवाजे पर आ पहुंची तो नुकसान का अनुमान लगाना संभव नहीं होगा।

