चुनाव खत्म, वसूली शुरू, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर अखिलेश ने कसा तंज
चुनाव खत्म, वसूली शुरू…। देशभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि होने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सरकार पर हमलावर रुख अपना लिया है। कांग्रेस ने तीखी टिप्पणी कर कहा कि, ‘महंगाई मैन’ ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया है। चुनाव खत्म होने के साथ वसूली आरंभ हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) भी मौके पर चौका लगाने में पीछे नहीं रही।
अखिलेश ने सोशल मीडिया पर शेयर किया वायरल कार्टून
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कार्टून शेयर कर लिखा कि हमने तो पहले ही कहा था कि साइकिल से बेहतर कुछ नहीं है। आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है। महंगाई के मुद्दे पर सियासत तेज होना तय है। पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा सीएनजी के दाम भी बढ़ गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का खर्च कम करने की अपील की थी। पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में वृद्धि की आशंका काफी पहले से जताई जा रही थी। हालांकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने तब चुप्पी साधे रखी थी। मिडिल ईस्ट संकट का असर आज समूची दुनिया पर पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बेशक युद्ध विराम चल रहा है, मगर पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस आदि की आपूर्ति अब तक सुचारू नहीं हो सकी है।
बद से बदतर होंगे हालात
होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक वाहन गुजर नहीं पा रहे हैं। वहां ईरान ने पाबंदियां लगा रखी हैं। सप्लाई बाधित रहने से भारत में अभी तक जैसे तैसे काम चल रहा था, मगर अब स्थिति और जटिल होती दिखाई पड़ रही हैं। अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आपूर्ति करने के लिए एक माह की मोहलत दे रखी है। यह डेडलाइन भी पूरी होने जा रही है। रूस से तेल की आपूर्ति पूर्णत बंद होने की स्थिति में हालात बद से बदतर हो सकते हैं।
देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि पर विपक्ष की नाराजगी जायज है, मगर पूरी दुनिया में जिस प्रकार के हालात कायम हैं, उसके मद्देनजर विपक्ष को सरकार की आलोचना करने की बजाए साथ देने की आवश्यकता है। जब बाहर से पेट्रोल-डीजल एवं सीएनजी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होगी तो सरकार क्या कर सकती है? विपक्ष को सिक्के के दोनों पहलुओं को देखने की जरूरत है।
अमेरिका और ईरान के हमलों में विभिन्न देशों में ऊर्जा उत्पादन के संयंत्रों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इन संयंत्रों को दोबारा से तैयार कर संचालन शुरू करने में लंबा समय लगना तय है। देश में महंगाई को रोकने के लिए सरकार भरसक प्रयास कर रही है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पीएम मोदी वर्क फ्रॉम होम, मेट्रो का उपयोग, कार पूलिंग और सोने की खरीद कम करने जैसे कदम उठाने की अपील कर चुके हैं।
सपा को कितना नुकसान पहुंचा सकता है राजकुमार भाटी का बयान
दुनिया इस समय युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के गंभीर दौर से गुजर रही है। यूक्रेन और ईरान जैसे वैश्विक संघर्षों के कारण कच्चे तेल, गैस, खाद, खाद्य तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें निरंतर बढ़ रही हैं। भारत इनका बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिससे देश पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। देश की आबादी डेढ़ सौ करोड़ के पार पहुंच चुकी है। बढ़ती आबादी के कारण समस्याओं में भी वृद्धि हो रही है। खर्चों में कटौती किए बगैर भविष्य में आसानी से गुजारा करना संभव नहीं हो पाएगा।

