ममता बनर्जी के पैरों तले खिसकी जमीन! शुभेंदु अधिकारी का ऐसा खौफ, TMC नेता को दौड़ाकर पीटा
सत्ता और समय बदलने पर रसूखदारों और गली-मोहल्ले के ‘गुंडों’ का हश्र कैसा होता है, इसका आंखों देखा हाल जानना है तो सीधे पश्चिम बंगाल चले जाइए। वहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उन समर्थकों का जनता-जनार्दन इलाज कर रही है, जिन्होंने पंद्रह साल तक मनमानी की थी। सूबे में भाजपा की सरकार आने से दबे-कुचले और पीड़ितों के भीतर का खौफ काफूर हो चुका है। लंबे समय तक परेशान रही जनता अब चुन-चुनकर बदले ले रही है। सोशल मीडिया पर इस प्रकार के सैकड़ों वीडियो वायरल हो रहे हैं।
टीएमसी नेता को दौड़ाकर पीटा
बीरभूम जिले में टीएमसी नेता के करीबी सहयोगी धनंजय को आक्रोशित भीड़ ने जमकर पीटा है। संकरी गली में भीड़ से घिरे धनंजय के बदन पर बनियान व शर्ट तक नहीं है। जान बचाने के लिए उसे गली में दौड़ लगानी पड़ी। ‘कट मनी’ के खेल से तंग आकर वहां के नागरिकों को यह कदम उठाना पड़ा है। इसके पहले टीएमसी सांसद सौगत रॉय के खिलाफ चोर-चोर के नारे लगे थे। यही नहीं रॉय की कार पर भीड़ द्वारा अड़े भी फेंके गए थे। इसी क्रम में बैरकपुर के सबसे खतरनाक माफिया डॉन और एक्सटॉर्शनिस्ट बोनी को पुलिस ने सबक सिखाया था।
पुलिस ने कथित डॉन की परेड तक निकाली थी। टीएमसी के शासन में बोनी का सिक्का चला करता था। वह धमकी देकर रंगदारी की वसूली करता था। इन तमाम घटनाओं पर टीएमसी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी निरंतर आक्रामक बयानबाजी कर रही हैं। वह भाजपा पर टीएमसी कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न करने का आरोप लगा रही हैं। कुल मिलाकर बंगाल का माहौल बदल चुका है। मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने कानून व्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए पुलिस को सख्त कार्रवाई की छूट दे रखी है। ममता के शासन में बंगाल के विभिन्न हिस्सों में जबरन वसूली का चलन आम था।
गैर कानूनी तरीके से करते थे टोल वसूली
टीएमसी के समर्थक जगह-जगह गैर कानूनी तरीके से टोल की वसूली तक करते थे। इसके अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री मालिकों से मनमाने तरीके से वसूली होती थी। वर्तमान में गैर कानूनी कार्यों को रोकने के लिए कहीं पुलिस तो कहीं पब्लिक एक्शन मोड में नजर आ रही है। पूर्व सीएम ममता बनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे नेता टीएमसी समर्थकों का साथ देने के नाम पर सिर्फ जुबानी जमा खर्च कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में इन दिनों बांग्लादेशी घुसपैठियों के पलायन का मामला भी सुर्खियों में है। शुभेंदु सरकार के तल्ख तेवरों को देखकर घुसपैठियों ने मैदान छोड़ना शुरू कर दिया है। बांग्लादेशी बॉर्डर के समीप सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी परिवार एकत्र हो चुके हैं। जिन्हें उनके मुल्क वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है। सीएम शुभेंदु अधिकारी साफ शब्दों में कह चुके हैं कि किसी भी घुसपैठिए को जेल नहीं भेजा जाए।
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घुसपैठियों को यदि बांग्लादेश नहीं अपनाता तो उन्हें डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा। बांग्लादेश की तरफ से घुसपैठ रोकने के लिए बॉर्डर पर तारबंदी का काम भी जोरों पर चल रहा है। इसके चलते भारत और बांग्लादेश में तनाव चल रहा है। इस मुद्दे पर भारत सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। वह कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। बॉर्डर पर तारबंदी को लेकर दोनों देशों के सैन्य जवानों में टकराव की नौबत तक आ चुकी है, मगर दिल्ली ने इस पड़ोसी मुल्क को संकेत दे दिया है कि यह काम कतई बंद नहीं होगा।

