नोएडा में ‘मजदूर संग्राम’: अखिलेश राहुल के तीखे हमले से हिली लखनऊ से दिल्ली तक की सत्ता
noida protest news: पूंजीपतियों के एटीएम में पैसे भरे जा रहे हैं, चूंकि पूंजीपतियों से भाजपा को चंदा मिलता है, मगर श्रमिकों-मजदूरों के वेतन के लिए इनके एटीएम खाली हैं। वेतनभोगी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! नोएडा में भड़के श्रमिक आंदोलन पर सपा मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की यह टिप्पणी सत्ता पक्ष पर तीखा जुबानी हमला है। पीछे कांग्रेस भी नहीं है।
कांग्रेस हुई हमलावर
उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जब महंगाई कमर तोड़ रही हो और वेतन के नाम पर मजदूरों का शोषण हो रहा है, तो युवा सड़क पर उतरने को मजबूर होगा ही। नोएडा में वेतन वृद्धि न होने पर निजी कंपनी के खिलाफ श्रमिकों का आक्रोश अभी तक ठंडा नहीं पड़ा है। नेतृत्वहीन श्रमिकों के तेवरों को देखकर योगी सरकार को एक्शन मोड में आना पड़ा है।
सरकार ने दावा किया है कि श्रमिकों की मांग मान ली गई है। हालांकि दूसरे दिन भी आंदोलन का आंशिक असर नजर आया। ऐसे में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन को कमर कस सड़कों पर उतरना पड़ा है। नारेबाजी और पत्थरबाजी के कारण आसपास के नागरिकों में भी दहशत का आलम है। इस पूरे विवाद की असल जड़ हरियाणा में है।
क्यों नाराज हुए श्रमिक
दरअसल हरियाणा की कंपनी में श्रमिकों के वेतन में बढ़ोत्तरी कर दी गई। इस कंपनी की नोएडा इकाई में जब यह खबर पहुंची तो श्रमिकों में नाराजगी उत्पन्न हो गई। प्रबंधन से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर वह भड़क गए। फिलहाल सरकार का पूरा जोर शांति एवं कानून व्यवस्था का पालन कराने पर है। बड़ी संख्या में श्रमिक नेताओं और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
प्रदर्शनी एवं दिशाहीन एवं नेतृत्वहीन होने की वजह से ज्यादा घातक साबित हो सकते हैं। इस बीच श्रमिक आंदोलन के बहाने विपक्ष को सत्ता पक्ष की घेराबंदी करने का सुनहरा मौका मिल गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मामले में कूद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी, जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
राहुल ने कहा कि मैं हर मजदूर के साथ हूं। इसके इतर इस मुद्दे पर सियासत गहराने से मामला और पेचीदा हो जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। योगी सरकार में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने श्रमिक आंदोलन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस आंदोलन के पीछे पाकिस्तान कनेक्शन होने की संभावना जाहिर कर दी है। वहीं, ऐसी आशंका है कि श्रमिकों के बीच कुछ ऐसे उपद्रवी थे, जिन्होंने सिर्फ फैक्ट्रियों को निशाना बनाया। उनके हाथों में थैले थे, उनमें पत्थर थे।
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थैलों में पत्थर से प्रतीत होता है कि फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ व वाहनों में आगजनी अचानक गुस्से का परिणाम नहीं थी, बल्कि पूर्व नियोजित था। नोएडा फेज टू में ग्यारह साल पहले भी इस प्रकार की घटना प्रकाश में आई थी। तब श्रमिकों ने एकजुट होकर फैक्ट्री प्रबंधन पर हल्ला बोल दिया था।
इस आंदोलन में पचास हजार कामगार सड़कों पर उतर आए थे। फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ कर वाहनों में आग लगा दी गई थी। बाद में तत्कालीन सरकार के हस्तक्षेप के उपरांत श्रमिकों की मांगें मान ली गई थी। बहरहाल श्रमिकों को धैर्य से काम लेने की जरूरत है। उन्हें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचे और आम नागरिक की परेशानी बढ़े।

