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गर्मी से भी बदतर होने वाले हैं हालात! अगर घर में AC है, तो आज ही जान लें ये खौफनाक चेतावनी

प्लीज ! गर्मी पड़ने तक मुझे कोई अपने घर पर बुला ले। मैं खाना बना दूंगी, सब्जी बना दूंगी। इस बहाने कम से कम एयर कंडीशनर (एसी) में रहने को मिल जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में खूबसूरत युवती की यह अपील बेशक रील्स के दीवानों के लिए मनोरंजन का साधन है। संभवत: अनाम युवती भी रील बनाने की शौकीन होगी, मगर भीषण गर्मी और लू की मार से बचने के लिए फिलवक्त कौन एसी में रहने का सुख नहीं भोगना चाहेगा।

प्रचंड गर्मी से हर कोई हल्कान है। पंखे व कूलर की हवा सुकून नहीं दे रही। घर में यदि इन्वर्टर नहीं है तो बिजली गुल होने पर हालत खराब हो जाती है। ऐसे में एसी की हवा तन-मन को संतुष्ट करने में मददगार साबित होती है। इस बीच भारत में एसी के बढ़ते उपयोग पर एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में बड़ी चिंता जाहिर की गई है। यह रिपोर्ट भविष्य के खतरों के प्रति आगाह करती है।

हर साल बिक रहे 1.5 करोड़ नए AC

भारत जैसे विकासशील और बड़ी आबादी वाले देश में एसी का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। साल दर साल एसी की संख्या में वृद्धि होने से बिजली सेक्टर पर भारी दबाव पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टडी ने नई चिंता को जन्म दिया है। देश में प्रतिवर्ष एक से डेढ़ करोड़ नए एसी की खरीद हो रही है। घरों और दफ्तरों में एसी की डिमांड निरंतर बढ़ रही है।

एक एसी, एलईडी बल्ब के मुकाबले सौ से डेढ़ सौ गुना अधिक बिजली का उपयोग करता है। स्टडी में चेतावनी दी गई है कि यदि एसी के प्रयोग को लेकर सख्त नियम नहीं बनाए गए तो देश में अगले दो साल में ब्लैक आउट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यानी बिजली का ऐसा गंभीर संकट पैदा हो जाएगा, जिसकी कल्पना करना भी संभव नहीं है।

रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों को अपनाने से देश, सरकार और उपभोक्ता तीनों को लाभ हो सकता है। कुछ दिन पहले दुनिया के दो सौ उन शहरों की सूची जारी हुई थी, जहां इस समय सर्वाधिक गर्मी पड़ रही है। इनमें सबसे ज्यादा शहर भारत के बताए गए थे।

जबकि भारत में भी यूपी के सबसे अधिक शहर गर्म पाए गए। कुछ शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर चुका है। जिनके पास दौलत और संसाधन हैं, उनके लिए गर्मी का मुकाबला करना मुश्किल नहीं है, मगर बड़ी आबादी गरीबों और मध्यम आय वर्ग की है। जिनके लिए एसी का प्रयोग करना मुमकिन नहीं है। विभिन्न राज्यों में झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में भी काफी संख्या में परिवार रहने को मजबूर हैं। इन परिवारों पर इस वक्त क्या गुजर रही होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

गर्मी से भी बदतर होने वाले हैं हालात!

दरअसल आम आदमी को अब गर्मी सहन करने व गर्मी में रहने की आदत नहीं रह गई है। एक समय था जब इन्वर्टर का बाजार गुलजार नहीं था। देश में तब बिजली का उत्पादन भी सीमित था। कई-कई दिन बिजली नहीं आती थी, मगर उस वक्त नागरिक भीषण गर्मी का मुकाबला कर लेते थे।

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आज घर-घर में इन्वर्टर लग चुके हैं। ऐसे में बिजली के जाने-आने का पता तक नहीं चल पाता। इसके अलावा जिंदगी आज फास्ट फूड की मोहताज होकर रह गई है। फास्ट फूड के सेवन से शरीर को नुकसान पहुंच रहा है। हरियाली कम होने से जलवायु परिवर्तन की बड़ी समस्या सामने खड़ी है। अलबत्ता प्रचंड गर्मी के लिहाज से आना वाला समय और कष्टकारी होना तय है।

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