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बर्थ से डेथ तक के सरकारी कागजात अब हुए बेहद महंगे, जेब पर सीधा असर; जानिए नई फीस

आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। अब जन्म से लेकर जीवन के आखिरी सर्टिफिकेट यानी डेथ सर्टिफिकेट (मृत्य प्रमाण पत्र) बनवाने के लिए पहले से कई गुना ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। शासन की ओर से जारी नए आदेश के बाद आवेदन शुल्क के ढांचे में बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। स्कूल में बच्चों का दाखिला कराना हो, आधार कार्ड बनवाना हो, पासपोर्ट के लिए अप्लाई करना हो या फिर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद पेंशन और संपत्ति से जुड़े जरूरी कानूनी काम निपटाने हों—हर जगह काम आने वाले इन जरूरी दस्तावेजों के लिए अब आपको ढीली करनी होगी।

2 की फीस सीधे ₹100 तक पहुंची: समझिए नया शुल्क स्ट्रैक्चर

प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, अब तक जो सामान्य आवेदन महज ₹2 में हो जाता था, उसकी फीस बढ़ाकर सीधे ₹20 कर दी गई है। वहीं, अगर आप तय समय सीमा के बाद यानी विलंब से आवेदन करते हैं, तो ₹5 के बजाय अब ₹50 का शुल्क देना होगा। सबसे बड़ा बदलाव पुराने रिकॉर्ड्स को खोजने और उनकी नई कॉपी निकालने की फीस में हुआ है; इसके लिए पहले की ₹10 की फीस को बढ़ाकर अब सीधे ₹100 कर दिया गया है।

ग्रामीण और गरीब परिवारों पर बढ़ेगा सबसे ज्यादा बोझ

देखने में भले ही यह रकम कुछ रुपयों की लग रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर लाखों परिवारों पर पड़ने वाला है। आज के समय में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति), आधार अपडेट और पासपोर्ट जैसे कामों के लिए अक्सर लोगों को एक से ज्यादा कॉपियां निकलवानी पड़ती हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बढ़ा हुआ शुल्क उनके मासिक बजट को बिगाड़ सकता है, खासकर उन्हें जिन्हें पहले से ही इन सरकारी कागजातों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

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फीस तो बढ़ी, पर क्या अब दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति?

इस फैसले के बाद आम जनता के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या फीस बढ़ने के बाद सरकारी सेवाओं की रफ्तार और गुणवत्ता में भी सुधार होगा? कई जिलों से लगातार यह शिकायतें आती रही हैं कि ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है और फाइलें अटकी रहती हैं। जानकारों का भी मानना है कि बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि नागरिक की कानूनी पहचान और अधिकारों की बुनियाद हैं, इसलिए बढ़ी हुई फीस के बदले अब जनता को तेज, पारदर्शी और परेशानी मुक्त (Hassle-free) सुविधाएं मिलना बेहद जरूरी है।

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