वर्ल्डहोम

सऊदी अरब और तुर्की के कंधों पर बंदूक रखकर भारत को घेरने की फिराक में पाकिस्तान, पढ़ें ये सनसनीखेज खुलासा

पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिला है, जिसे मध्य पूर्व में बदलते हुए सुरक्षा समीकरणों का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक ऐतिहासिक ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ (Mecca Joint Defense Pact) संपन्न हुआ है।

इस नए सुरक्षा गठजोड़ की सबसे डरावनी और मुख्य शर्त “एक पर हमला यानी सभी पर हमला” रखी गई है, जिसका सीधा मतलब यह है कि अगर इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर बाहरी आंच आती है, तो बाकी के दोनों देश उसके समर्थन में एक मजबूत ढाल बनकर खड़े हो जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे पश्चिमी देशों के ‘नाटो’ (NATO) संगठन की तर्ज पर तैयार किया गया एक नया सुरक्षा ढांचा माना जा रहा है, जिसकी आड़ लेकर पाकिस्तान अब भारत पर कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाने की खतरनाक फिराक में जुट गया है।

सऊदी अरब इस नए रक्षा गठजोड़ के लिए क्यों हुआ तैयार?

हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सऊदी अरब जैसा आर्थिक और सैन्य रूप से बेहद ताकतवर देश इस तरह के त्रिस्तरीय समझौते के लिए राजी क्यों हुआ? रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो इस पूरी व्यवस्था की जमीन पश्चिम एशिया में बने मौजूदा और तनावपूर्ण हालातों ने तैयार की है।

ईरान के साथ लगातार जारी भीषण संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बीच खाड़ी देशों का अमेरिका की पारंपरिक सुरक्षा गारंटी पर से भरोसा धीरे-धीरे डगमगाने लगा था। पारंपरिक रूप से खाड़ी के देश अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर हुआ करते थे, लेकिन अमेरिका के बदलते रुख और मध्य पूर्व की अनिश्चितताओं ने सऊदी अरब को नए और मजबूत विकल्पों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया। इसी मौके का पूरा फायदा उठाते हुए पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब के साथ मिलकर इस बड़े रक्षा गठजोड़ को अमली जामा पहना दिया।

क्या अन्य खाड़ी देश भी हो सकते हैं इस समझौते का हिस्सा?

रणनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह भू-राजनीतिक खेल सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान इस नए सुरक्षा ढांचे का भरपूर फायदा उठाकर सऊदी और तुर्की के अलावा अन्य प्रमुख अरब देशों को भी अपने पाले में जोड़ने की कोशिश कर रहा है। जानकारी के मुताबिक कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देश ऐसे हैं जिनके साथ पाकिस्तान के पहले से ही बेहद गहरे और मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। अब ऐसी प्रबल आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में कतर और कुवैत जैसे देश भी इस रक्षा समझौते का हिस्सा बन सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो पूरे मुस्लिम जगत में पाकिस्तान की रणनीतिक और सैन्य भूमिका कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे उसे न सिर्फ भारी-भरकम आर्थिक मदद और एडवांस हथियार मिलेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी कूटनीतिक स्थिति भी काफी मजबूत हो जाएगी।

भारत की बढ़ी टेंशन, क्यों खतरनाक है ये मक्का समझौता

मक्का समझौते के सामने आने के बाद से ही भारतीय रणनीतिक हलकों में चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) को बढ़ावा मिलने का है। इस नए सुरक्षा गठजोड़ के जरिए पाकिस्तान को भारी आर्थिक संसाधनों और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक तक सीधी पहुंच मिल जाएगी।

विशेषज्ञों को इस बात का डर सता रहा है कि सऊदी और अन्य अरब देशों से मिलने वाली इसी आर्थिक और सामरिक मदद का दुरुपयोग कर आईएसआई भारत में सीमा पार आतंकवाद की गतिविधियों को और तेज कर सकती है।

दूसरा अहम पहलू सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने की एक सोची-समझी साजिश है। भारत ने यह दुनिया को साफ कर दिया है कि किसी भी आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। लेकिन अब पाकिस्तान इस समझौते को एक सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।

यूरोप में इमरजेंसी! स्पेन बॉर्डर पर उमड़ी हजारों की भीड़, मोरक्को से अवैध घुसपैठ ने उड़ाई दुनिया की नींद

पाकिस्तान के पूर्व ब्रिगेडियर फारुख हमीद के मुताबिक, “एक पर हमला यानी सब पर हमला” वाली शर्त का इस्तेमाल करके पाकिस्तान यह अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने की कोशिश करेगा कि भारत की कोई भी सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब और तुर्की पर हमला मानी जाए, ताकि भारत पर भारी वैश्विक दबाव बनाया जा सके।

तीसरा बड़ा कारण भारत पर दो तरफ़ा कूटनीतिक दबाव बनाना है, जहां पाकिस्तान अपनी पूर्वी सीमा के साथ-साथ अरब दुनिया की नई कूटनीतिक ताकत का हवाला देकर भारत को घेरने की कोशिश करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *