अखिलेश यादव का सबसे बड़ा किला ध्वस्त! क्या 2027 में रामपुर की खोई हुई विरासत वापस पा पाएगी सपा?
उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी सियासी गढ़ों और सियासी वर्चस्व के टूटने की चर्चा होती है, तो रामपुर विधानसभा सीट की मिसाल सबसे पहले दी जाती है। वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि नवाबों की विरासत और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान का दशकों पुराना राजनीतिक किला उपचुनाव में ढह गया और वहां भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। कभी सपा की पहचान बनी इस सीट पर आज भाजपा के आकाश सक्सेना विधायक हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस हासिल कर पाएंगे, या फिर बीजेपी अपने इस नए राजनीतिक आधार को और मजबूत करेगी?
1974 से 2022 तक: कांग्रेस के दौर से आजम खान के अजेय दुर्ग की पूरी कहानी
रामपुर का राजनीतिक इतिहास कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। 1974 और 1977 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा था। इसके बाद 1980 का दौर आया, जब आजम खान ने पहली बार रामपुर से विधानसभा चुनाव जीता। 1985, 1989 और 1991 में आजम खान विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर अपनी जीत का सिलसिला बनाए रखने में कामयाब रहे। साल 1993 में वे पहली बार समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि 1996 में कांग्रेस के अफरोज अली खान ने आजम खान के इस विजय रथ को रोका, लेकिन उसके बाद रामपुर सपा का ऐसा अभेद्य किला बना कि 2002, 2007, 2012 और 2017 में लगातार चार बार आजम खान ने सपा के टिकट पर प्रचंड जीत हासिल की। 2019 के उपचुनाव में उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और फिर 2022 के मुख्य विधानसभा चुनाव में खुद आजम खान ने बीजेपी के आकाश सक्सेना को 55,000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से मात दी।
2022 का उपचुनाव: बीजेपी की ऐतिहासिक एंट्री और खिला कमल
2022 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही कानूनी मामलों के चलते आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई, जिसके बाद दिसंबर 2022 में रामपुर सदर सीट पर उपचुनाव कराया गया। इस उपचुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर आकाश सक्सेना पर दांव लगाया, जबकि समाजवादी पार्टी ने आजम खान के करीबी आसिम रजा को चुनावी मैदान में उतारा। जब नतीजे आए तो सियासी गलियारों में हलचल मच गई, क्योंकि बीजेपी प्रत्याशी आकाश सक्सेना ने सपा के आसिम रजा को 34,136 मतों के भारी अंतर से शिकस्त देकर पहली बार रामपुर विधानसभा सीट पर भगवा परचम लहराया और दशकों पुराने सियासी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया।
जनता के जमीनी मुद्दे: रोजगार, विकास, जौहर यूनिवर्सिटी और कानूनी विवाद
रामपुर के स्थानीय चुनावी समीकरणों पर गौर करें तो यहां का मतदाता बुनियादी नागरिक सुविधाओं, बेहतर शिक्षा, महंगाई पर लगाम और युवाओं के लिए रोजगार की मांग को लेकर मुखर है। इसके अलावा आजम खान की सियासी विरासत, उन पर चल रहे कानूनी मुकदमे और मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद हमेशा चर्चा के केंद्र में रहते हैं। चुनावी मंचों पर बीजेपी और सपा के बीच मुस्लिम मतदाताओं का रुख, पसमांदा फैक्टर और ‘पहचान की राजनीति बनाम विकास का एजेंडा’ प्रमुख बहस का मुद्दा बना रहता है।
2027 की तैयारी: बीजेपी का रिपोर्ट कार्ड बनाम अखिलेश का ‘पीडीए’ फॉर्मूला
आगामी 2027 के रण के लिए मौजूदा बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना और पार्टी संगठन रामपुर में अपनी पकड़ को स्थाई बनाने में जुटे हैं। बीजेपी यहां कानून व्यवस्था में सुधार, महिला सुरक्षा, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जनहितैषी कल्याणकारी योजनाओं और खासकर पसमांदा मुस्लिम समाज के बीच अपनी पैठ को चुनावी हथियार बना रही है। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के लिए रामपुर प्रतिष्ठा का सवाल है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा यहां अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने, बूथ स्तर पर बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) तैनात करने और जमीनी बैठकों पर जोर दे रही है। रामपुर में सपा के भावी उम्मीदवार के चयन में आजम खान के प्रभाव और अखिलेश की नई रणनीति का तालमेल देखने लायक होगा।
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2024 के लोकसभा आंकड़ों ने बढ़ाई हलचल, कांग्रेस के वजूद की चुनौती
यद्यपि 2022 के उपचुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा वार आंकड़ों ने इस मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया है। लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर विधानसभा क्षेत्र के दायरे में सपा प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी को 1,00,395 वोट हासिल हुए, जबकि बीजेपी प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोदी को 65,275 वोट मिले। यानी इस विधानसभा क्षेत्र में सपा ने बीजेपी पर 37,820 मतों की बड़ी बढ़त दर्ज की थी। वहीं कभी इस सीट पर राज करने वाली कांग्रेस पार्टी 2022 के चुनाव में करीब 4,000 वोटों पर सिमट कर मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आई थी। ऐसे में 2027 के महासमर में यह देखना दिलचस्प होगा कि रामपुर की जनता एक बार फिर साइकिल पर भरोसा जताती है या फिर कमल का दबदबा कायम रहता है।

