उत्तर प्रदेशपॉलिटिक्सहोम

UP Rajya Sabha Election 2026: 16 अक्टूबर को UP में राज्यसभा का रण, जानें 10 सीटों पर किसके खाते में क्या जाएगा

UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के औपचारिक रण से ठीक पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने उच्च सदन के लिए चुनावी बिगुल फूंकते हुए उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान और उसी शाम मतगणना की घोषणा कर दी है। इन सभी सीटों पर मौजूदा सांसदों का छह वर्षीय कार्यकाल आगामी 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। सियासी गलियारों में सबसे बड़ा कौतूहल इस बात को लेकर है कि क्या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर 8 सीटें निकालने में सफल होगी और क्या मायावती की बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में पूरी तरह शून्य हो जाएगा।

कौन-कौन से दिग्गज सांसद हो रहे हैं रिटायर?

उत्तर प्रदेश की जिन 10 सीटों पर निर्वाचन होना है, उनमें से 8 सीटें वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के पास हैं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में है। रिटायर होने वाले भाजपा सांसदों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बृज लाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा और डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद वह सदन से अलग हो चुके हैं, लेकिन उनकी सीट का मूल कार्यकाल 25 नवंबर 2026 तक था, इसलिए यह सीट भी इसी नियमित चक्र में भरी जा रही है। वहीं विपक्षी खेमे से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता प्रो. राम गोपाल यादव और बसपा के इकलौते राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम की सदस्यता भी इसी तारीख को पूरी हो रही है।

397 विधायकों का संख्याबल और जीत का गणित

राज्यसभा चुनाव में सीधे जनता के बजाय राज्य के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं, इसलिए विधानसभा का मौजूदा अंकगणित ही पूरी तस्वीर तय करता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से 6 सीटें फिलहाल रिक्त हैं, जिसके चलते सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 397 है। इस फार्मूले के तहत एक प्रत्याशी को जीत दर्ज करने के लिए पहली प्राथमिकता के कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार होगी। वर्तमान में भाजपा के पास अपने 256 विधायक हैं। एनडीए गठबंधन में शामिल अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक मौजूद हैं। इसके साथ ही जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2 विधायकों का समर्थन भी सत्ता पक्ष के साथ माना जा रहा है। इस तरह एनडीए खेमे की कुल ताकत लगभग 291 विधायकों तक पहुंचती है। दूसरी तरफ विपक्ष में समाजवादी पार्टी के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक हैं।

7 सीटों पर NDA की एकतरफा जीत तय, 8वीं सीट पर 5 वोटों का पेच

संख्याबल के लिहाज से एनडीए का पलड़ा बेहद भारी नजर आ रहा है। 7 सीटें जीतने के लिए 259 वोटों (37 × 7) की आवश्यकता है, जबकि गठबंधन के पास 291 विधायक हैं। यानी 7 उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी सत्ताधारी गठबंधन के पास 32 अतिरिक्त वोट सुरक्षित बचते हैं। हालांकि असली राजनीतिक रस्साकशी 8वीं सीट को लेकर शुरू होती है। कुल 8 सीटें जीतने के लिए एनडीए को 296 वोटों (37 × 8) का जादुई आंकड़ा चाहिए, जबकि उसके पास 291 वोट हैं। यानी भाजपा को 8वीं सीट झटकने के लिए कम से कम 5 अतिरिक्त वोटों की सख्त जरूरत पड़ेगी। यह अंतर केवल विपक्षी विधायकों की क्रॉस वोटिंग या गैर-गठबंधनीय विधायकों में सेंधमारी से ही पूरा हो सकता है, जैसा कि 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के 6 और सुभासपा के 1 विधायक के पाला बदलने के दौरान देखने को मिला था।

समाजवादी पार्टी की 2 सीटें सुरक्षित, 10वीं सीट बनेगी कुरुक्षेत्र

विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी अपने 101 विधायकों और कांग्रेस के 2 विधायकों के साथ 103 की संख्या पर खड़ी है। दो प्रत्याशियों की जीत के लिए केवल 74 वोटों (37 × 2) की आवश्यकता है, जिससे सपा की दो सीटों पर जीत पूरी तरह पक्की और सुरक्षित मानी जा रही है। इसके बाद भी सपा के पास लगभग 29 अतिरिक्त वोट सरप्लस रहेंगे। इस तरह एनडीए की 7 और सपा की 2 सीटें निकलने के बाद सदन की 10वीं सीट असल अखाड़ा बन जाएगी, जहां दोनों ही पक्षों के पास 37 के कोटे से कम वोट बचेंगे। इस 10वीं सीट को फतह करने के लिए दोनों पक्षों को क्रॉस-वोटिंग और निर्दलीयों के सहारे अतिरिक्त वोट जुटाने की पुरजोर कोशिश करनी होगी।

मायावती की BSP का राज्यसभा से पत्ता साफ होने के आसार

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका बहुजन समाज पार्टी को लगने जा रहा है। पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। उधर यूपी विधानसभा में एकमात्र बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के असामयिक निधन के बाद विधानसभा में पार्टी की सदस्य संख्या पहले ही शून्य हो चुकी है। चूंकि चुनाव में मतदान केवल विधायक करते हैं और बसपा के पास सदन में एक भी वोट नहीं है, ऐसे में पार्टी के लिए अपना प्रत्याशी उतारना या सीट बचा पाना असंभव हो चुका है। यदि कोई अप्रत्याशित चमत्कार नहीं हुआ तो आजादी के बाद के दशकों में यह पहला मौका होगा जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से उच्च सदन में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

सपा का मास्टरस्ट्रोक, 75 जिले 75 विजन, जानें क्या है अखिलेश यादव का माइक्रो लेवल विजन जिससे कि बीजेपी हो जाएगी चारों खाने चित्त

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों गठबंधनों का शक्ति परीक्षण

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक जमीन तैयार हो रही है, ऐसे में यह राज्यसभा चुनाव दोनों गठबंधनों के लिए अपनी संगठनात्मक मजबूती और एकजुटता साबित करने का बड़ा मंच बन गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के अप्रत्याशित उभार के बाद भाजपा के सामने अपने सहयोगियों को एकजुट रखते हुए 8वीं सीट निकालने की प्रतिष्ठापूर्ण चुनौती है, जबकि अखिलेश यादव के सामने अपने विधायकों को टूट से बचाने और एनडीए के 8वें प्रत्याशी को पटखनी देने का कड़ा इम्तिहान होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *