लाइफस्टाइलहोम

christmas day 2025: इन देशों में क्रिसमस मनाया तो जाना पड़ा सकता है जेल

christmas day 2025: दिसंबर का महीना आते ही हवाओं में एक अलग सी ठंडक और खुशियों की आहट महसूस होने लगती है। हर तरफ सांता क्लॉज और जगमगाते सितारों की धूम मच जाती है। 25 दिसंबर को प्रभु ईसा मसीह के जन्मदिन के तौर पर पूरी दुनिया बड़े चाव से मनाती है। हमारे देश भारत में भी इसकी रौनक देखते ही बनती है। केरल के चर्चों से लेकर पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की गलियों तक हर जगह प्रार्थनाओं का दौर चलता है। इस साल भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली के सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल जाकर देशवासियों को सद्भावना का संदेश दिया।

मगर क्या आप जानते हैं कि जब आधी दुनिया केक और रोशनी में डूबी होती है तब कुछ देश ऐसे भी हैं जहां सन्नाटा पसरा रहता है? यहां तो क्रिसमस मानने पर आपको जेल भी जाना पड़ा सकता है।

वो देश जहां 25 दिसंबर महज एक आम दिन है

सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है मगर दुनिया के नक्शे पर कई ऐसे देश हैं जहां क्रिसमस का कोई वजूद नहीं है। इन देशों की सूची में सबसे ऊपर चीन का नाम आता है। चीन में 25 दिसंबर किसी भी दूसरे कामकाजी दिन की तरह होता है। वहां न तो दफ्तरों की छुट्टी होती है और न ही बाजारों में वैसी कोई खास रौनक दिखती है।

पड़ोसी देशों का हाल, छुट्टी है पर जश्न नहीं

भारत के पड़ोसियों की बात करें तो पाकिस्तान में 25 दिसंबर को सरकारी छुट्टी तो रहती है मगर उसका कारण क्रिसमस नहीं है। वहां यह दिन देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान में लंबे समय से चल रहे धार्मिक और वैचारिक संघर्षों के कारण ईसा मसीह के जन्मदिन का जश्न मनाने की मनाही जैसी स्थिति है।

भूटान और सोमालिया की अलग कहानी

भूटान अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता है मगर यहां ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या महज एक प्रतिशत के करीब है। भूटान के आधिकारिक कैलेंडर में क्रिसमस को कोई स्थान नहीं दिया गया है। वहां अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाना काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है और कई बार उन्हें अपनी पहचान को लेकर असहजता का सामना भी करना पड़ता है।

इस गांव में शादी से पहले तोड़ दिए जाते हैं दुल्हन के दांत, जानें वजह

अफ्रीकी देश सोमालिया की स्थिति तो और भी सख्त है। वहां कड़े धार्मिक कानून लागू हैं जिसके चलते क्रिसमस मनाना (christmas banned) पूरी तरह प्रतिबंधित है। सोमालिया में इस दिन किसी भी तरह का धार्मिक आयोजन या खुशियां मनाना कानून के खिलाफ माना जाता है।

ये वाकई दिलचस्प है कि जिस त्योहार को हम प्रेम और शांति का प्रतीक मानते हैं उसे लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इतनी विविधता और पाबंदियां हैं। एक तरफ जहां भारत में हर मजहब के लोग एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं वहीं इन देशों की हकीकत हमें धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व को दोबारा समझने पर मजबूर करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *