chhath puja 2025: ये 5 जरूरी नियम जानकर पहली बार व्रत करें और पाएं छठी मैया का आशीर्वाद
chhath puja niyam 2025: सूरज की पहली किरण और छठी मैया की असीम कृपा। जी हां, छठ पूजा का पर्व आ रहा है और अगर आप भी पहली बार यह पवित्र व्रत रखने जा रहे हैं, तो आपको बता दें कि यह व्रत सिर्फ श्रद्धा का नहीं बल्कि अनुशासन और सावधानी का भी प्रतीक है। एक छोटी सी गलती आपकी तपस्या को प्रभावित कर सकती है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पहली बार छठ व्रत रखते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना है ताकि आपकी पूजा सफल हो और छठी मैया का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो।
छठ पूजा चार दिनों का कठिन मगर आध्यात्मिक अनुष्ठान है जिसमें नहाए खाए खरना डूबते सूरज को अर्घ और उगते सूरज को अर्घ जैसे चरण शामिल है। पहली बार व्रत रखने वाले अक्सर उत्साह में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो chhath puja niyam 2025 को प्रभावित कर सकती है। तो चलिए कुछ जरूरी बातें जानते हैं।
इन पांच बातों का जरूर रखें ध्यान
पहला है शुद्धता का ध्यान रखें। छठ पूजा में शुद्धता सर्वोपरि है। व्रत शुरू करने से पहले घर को अच्छी तरह साफ करें। बर्तनों को शुद्ध पानी से धोएं और पूजा सामग्री को अलग रखें। व्रत करने वाले को सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन, प्याज या मांसाहारी भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। अगर आप घर में खाना बना रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि रसोई में कोई अशुद्धि ना हो।
दूसरा समय और नियमों का पालन हर चरण का समय बहुत महत्वपूर्ण है। नहाई खाई के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। खरना के दिन चावल, दाल और गुड़ की खीर बनाएं। मगर इसे बनाने से पहले स्नान जरूरी है। आरके के समय सूर्य की स्थिति का ध्यान रखें। देर होने पर आपका आर्य स्वीकार नहीं होगा।
तीसरा पूजा सामग्री की पूरी तैयारी। छठ पूजा में बांस की टोकरी, सूप, फल, ठेकुआ और दीपक जैसी चीजें जरूरी है। सामग्री की सूची पहले से तैयार कर लें। अधूरी सामग्री पूजा को प्रभावित कर सकती है। खासकर सूप और टोकरी को शुद्ध रखें क्योंकि यही छठी मैया को अर्पित किया जाता है। चौथा है मानसिक और शारीरिक तैयारी। 36 घंटे का निर्जला व्रत आसान नहीं है। इसे करने से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो जबरदस्ती व्रत ना करें। मानसिक रूप से शांत रहें। गुस्सा या नकारात्मक विचारों से बचे छठी मैया की भक्ति में डूबकर ही यह व्रत पूरा होता है।
Chhath Puja 2025: 6,500 की फ्लाइट अब 35,000 की, जानिए क्यों लोग रह गए घर से दूर
पांचवा है स्थानीय परंपराओं का सम्मान। छठ पूजा की परंपराएं क्षेत्र के हिसाब से थोड़ी अलग हो सकती है। ऐसे में अपने परिवार या स्थानीय बुजुर्गों से सलाह लें। गलत परंपरा अपनाने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। छठा है गलतियों से बचें। दोस्तों कई लोग उत्साह में नियम तोड़ देते हैं। जैसे पूजा के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल, गंदे कपड़े पहनना या शुद्ध स्थान पर अर्घ देना।
इन सब से बचें सूर्य को अर्घ देते समय पानी में खड़े रहें और सूरज की ओर मुंह करें। छठ पूजा का व्रत श्रद्धा और संयम का अनूठा संगम है। इन बातों का ध्यान रखकर आप छठी मैया का आशीर्वाद जरूर पाएंगे।

