6 हजार की नौकरी और 200 करोड़ का साम्राज्य, इस सरकारी अफसर की काली कमाई देख उड़ जाएंगे आपके होश
‘ना बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया’। यह चर्चित कहावत अक्सर सुनने को मिलती है। वाकई पैसा आज सभी रिश्तों और भावनाओं से बढ़कर है। पैसों की भूख इंसान की मति को मार देती है। वह लालसा की गहरी दलदल में धंसता चला जाता है। पाप की कमाई का घड़ा भरकर जब फूटता है तो हाथ मलने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं बचता। आखिरकार गलत कार्यों का बुरा परिणाम एक न एक दिन भुगतना पड़ता है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की गिरफ्त में आए सरकारी अधिकारी जे. मोहन नायक की काली कमाई का कच्चा चिट्ठा सामने आने पर हर कोई अवाक रह गया। तेलंगाना के रोड एंड बिल्डिंग्स विभाग के प्रमुख नायक लगभग दो सौ करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति के मालिक बताए जाते हैं। वे ब्लैक मनी का हिसाब-किताब नहीं दे पाए हैं। नोटों की गड्डियां, चमचमाती ज्वेलरी, महंगे ब्रांड की शराब की बोतलें, लग्जरी कारें, आलीशान कोठियां और ना जाने क्या-क्या? सरकारी पद का दुरुपयोग कर वह सालों से अपनी तिजोरी को भरते रहे।
तनख्वाह 6 हजार और घर से मिले नोटों के बंडल
जांच में पता चला है कि नायक की जॉब जिस समय लगी थी तब वे प्रतिमाह सिर्फ छह हजार रुपए की तनख्वाह पाते थे। ठेकेदारों से कमीशन और टेंडर फिक्सिंग के जरिए वह काली कमाई करते रहे। तेलंगाना के राजनीतिक और सरकारी गलियारों में यह मामला इन दिनों सुर्खियों में है। एसीबी की कार्रवाई ने भ्रष्ट अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। मोहन नायक से पूछताछ के बाद कुछ ठेकेदारों और अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय हैं। देश में भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला प्रकाश में नहीं आया है।
पूर्व में भी इस प्रकार के प्रकरण सुनने एवं देखने को मिलते रहे हैं। भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और सर्वाधिक आबादी वाले देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। भ्रष्टाचार का कीड़ा देश को भीतर से निरंतर खोखला कर रहा है। देश में अस्सी करोड़ से अधिक नागरिक आज भी प्रतिमाह सरकार से निशुल्क राशन लेने को मजबूर हैं।
करोड़ों की संख्या में नागरिक अभी भी गरीबी से जंग लड़ रहे हैं। बेहतर जीवनशैली के लिए उन्हें दिन-रात संघर्ष करना पड़ रहा है। इसके इतर बेईमानों की लिस्ट लंबी हो रही है। गलत रास्ते के जरिए सफलता का शॉर्टकट अपनाकर एक वर्ग रातों-रात लखपति से करोड़पति बन रहा है। भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें यदा-कदा एक्शन में नजर आती हैं, मगर जमीनी हालात नहीं सुधर पाते। सरकारी विभागों में काम कराने के लिए ‘सबसे बड़ा रुपैया’ वाला फॉर्मूला अपनाना पड़ता है।
यूपी से भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
उत्तर प्रदेश में कुछ साल पहले नोएडा प्राधिकरण के इंजीनियर यादव सिंह की गिरफ्तारी का मामला खूब चर्चाओं में रहा था। यादव सिंह के पास अकूत धन-दौलत एवं संपत्तियां होने की जानकारी सामने आई थी। सपा और बसपा की सरकारों के दौरान वह खुलकर ब्लैक मनी अर्जित करता रहा था। तेलंगाना के मामले ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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सिर्फ जे. मोहन नायक जैसे अधिकारियों पर शिकंजा कसने से बात नहीं बनेगी। भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगाने वाले सभी व्यक्तियों को न्याय के कटघरे में लाने की जरूरत है। भ्रष्टाचारियों और उनके मददगारों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो नजीर बन सके। चूंकि जेल जाने के बाद भ्रष्टाचारी पैसे और रसूख के दम पर सलाखों के पीछे भी आरामदायक जीवन गुजार देते हैं।

