30 मिनट का जाम, धूप में तड़पती प्रेग्नेंट महिला… और सड़क पर बैठ गया बेबस पति! VIP कल्चर ने पार की सारी हदें
कल्पना कीजिए, आपसे कहा जाए कि ‘क्षमा कीजिए, आपकी आपातकालीन स्थिति में कुछ वक्त लग सकता है। कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति सड़क का उपयोग कर रहा है।’ क्या आप इसे स्वीकार करेंगे? सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर यह पोस्ट देश में वीआईपी कल्चर से त्रस्त जनता के दर्द को उजागर कर रही है। कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘वीआईपी’ मूवमेंट की वजह से रोके गए ट्रैफिक पर छिड़ी बहस ने जनता का पारा गरम कर रखा है।
बेंगलुरु का मामला बना चर्चा का विषय
‘एक्स’ पर वायरल 64 सेकंड के वीडियो में एक व्यक्ति तेज धूप में सड़क के बीचों-बीच बैठकर धरना देता नजर आ रहा है। उस व्यक्ति को ट्रैफिक पुलिस के कुछ जवान उठाने का प्रयास करते हैं। दरअसल बेंगलुरु में राज्यपाल का काफिला सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए ट्रैफिक को रोक दिया गया था। ऐसे में एक दंपति ट्रैफिक में फंस जाता है। गर्भवती महिला को परेशानी होने पर नाराज पति को सड़क पर धरना देना पड़ता है।
दरअसल यह दंपति तीस मिनट तक ट्रैफिक में फंसा रहा। वीआईपी मूवमेंट पूरा होने के बाद यातायात को आगे जाने की इजाजत दी गई। बेंगलुरु का यह प्रकरण सोशल मीडिया पर बहस के केंद्र में है। बड़ी संख्या में यूजर्स वीआईपी कल्चर की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। बेंगलुरु की घटना ने देश में वीआईपी कल्चर के खिलाफ आम जनता के बीच सुलगते गुस्से को एक बार फिर सामने ला दिया है।
भारत में धार्मिक स्थलों से लेकर सड़कों तक पर वीआईपी कल्चर देखने को मिलता है। इसका खामियाजा अक्सर नागरिकों को भुगतना पड़ता है। विभिन्न धार्मिक स्थलों पर निरंतर वीआईपी व्यक्ति दर्शन करने पहुंचते हैं। उनके चक्कर में आम श्रद्धालुओं को कई-कई घंटे कतार में खड़ा रहना पड़ता है। अदालतों ने भी कई बार मंदिरों और सरकारी कार्यक्रमों में वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाए हैं।
सरकार द्वारा कई मौकों पर मंत्रियों और नेताओं के काफिलों व सुरक्षा में कटौती करके सादगी अपनाने के संदेश दिए गए हैं, मगर जमीनी स्तर पर जनता अभी भी इस संस्कृति से जूझ रही है। इससे एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होती रहती हैं। पीएम मोदी ने पिछले पिछले माह इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने सभी मंत्रियों और अधिकारियों से आधिकारिक प्रोटोकॉल के दौरान सादगी और किफायत बरतने का आग्रह किया था। पीएम ने सत्ता के इस प्रकार के दिखावे के बजाय सादगी और कार्यकुशलता पर बल देने की बात कही थी।
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गवर्नेंस में फिजूलखर्ची और जनता की असुविधा को कम करने के लिए, पीएम ने अपने खुद के काफिले के आकार में पचास प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया था। इसके अलावा अनावश्यक खर्चों और प्रदूषण को रोकने के लिए काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने के निर्देश भी दिए थे। लोकतांत्रिक समाज में आम और खास के अंतर को मिटाने के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
सार्वजनिक संस्थानों में वीआईपी व्यक्तियों को दी जाती है विशेष तरजीह
देश में वीआईपी कल्चर का मतलब ऊंचे पद पर बैठे सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और मशहूर हस्तियों को दिए जाने वाले विशेष व्यवहार और विशेषाधिकारों से है। ऐसे में किसी नेता, मंत्री या आला अधिकारी से अपना रिश्ता जोड़कर चालान या फाइन से बच निकलने की कोशिश की जाती है। सार्वजनिक संस्थानों में वीआईपी व्यक्तियों को विशेष तरजीह दी जाती है, जिससे आमजन को उचित सेवा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। ट्रैफिक पुलिस वीआईपी काफिलों को प्राथमिकता देती है, जिससे आम जनता को ट्रैफिक नियमों के सख्त अनुपालन के बावजूद असुविधा का सामना करना पड़ता है।

