दिल छू लेगी सरकार की ये नई स्कीम, सरकारी अस्पतालों में जन्म बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी
Gold ring for Newborn: तमिलनाडु सरकार ने नवजात बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बेहद अनोखी और दिल छू लेने वाली योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘थाईमाथंगा मोथिरम थिटम स्कीम’ (Thaimathanga Mothiram Thittam Scheme) शुरू करने जा रही है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले हर बच्चे को एक ग्राम की सोने की अंगूठी उपहार में दी जाएगी।
यह योजना न केवल आर्थिक मदद करेगी, बल्कि तमिल संस्कृति की एक गहरी परंपरा से भी जुड़ी है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी एबीसीडी और यह कैसे काम करेगी।
मामा बनकर नवजात बच्चों का स्वागत करेगी सरकार
तमिल संस्कृति में ‘थाई मामन सिर’ यानी सगे मामा द्वारा भांजे या भांजी के जन्म पर उपहार देने की एक खास और पवित्र परंपरा है। मामा का यह उपहार परिवार की खुशियों को दोगुना कर देता है। तमिलनाडु सरकार के आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस योजना के जरिए अब राज्य सरकार खुद हर नवजात के लिए ‘मामा’ की भूमिका निभाएगी। सरकार बच्चे के इस दुनिया में आगमन पर एक ऐसा सोने का उपहार देगी जो हमेशा याद रहेगा।
13,600 रुपये की होगी सोने की अंगूठी
मौजूदा बाजार कीमतों के हिसाब से नवजात को दी जाने वाली एक ग्राम सोने की अंगूठी की लागत करीब 13,600 रुपये आएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना को बिना किसी रुकावट के जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इसके लिए एक विशेष प्रशासनिक निकाय यानी ‘स्टेट प्रोजेक्ट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट’ (State Project Program Management Unit) का गठन किया जाएगा, जो इस पूरी योजना की बारीकी से निगरानी, प्रबंधन और इसका सही इंप्लीमेंटेशन (क्रियान्वयन) सुनिश्चित करेगी।
15 सितंबर से शुरुआत, 22 जून से ही माना जाएगा प्रभावी
इस कल्याणकारी योजना की आधिकारिक और भव्य शुरुआत आगामी 15 सितंबर को की जाएगी। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इसे 22 जून से ही प्रभावी माना जा रहा है। इसका मतलब है कि 22 जून के बाद से सरकारी अस्पतालों में जन्म ले चुके और लेने वाले बच्चे इस योजना के दायरे में आएंगे।
755 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट
तमिलनाडु में हर साल लगभग 7.8 लाख बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से करीब 4.2 लाख डिलीवरी अकेले सरकारी अस्पतालों में होती है। इन सभी बच्चों को कवर करने के लिए सरकार ने हर साल लगभग 755.83 करोड़ रुपये का एक बड़ा बजट तय किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित, आधुनिक और सस्ती डिलीवरी के लिए प्रोत्साहित करना है।
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अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी अस्पतालों में एक डिलीवरी का औसत खर्च महज 1,364 रुपये आता है, जबकि निजी अस्पतालों (Private Hospitals) में यही खर्च 63,000 रुपये से भी ज्यादा ऊपर चला जाता है। ऐसे में यह योजना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने वाली है।

