यूपी चुनाव से पहले पंकज चौधरी की नई टीम घोषित, सपा के PDA फॉर्मूले को ध्वस्त करने का मास्टरप्लान तैयार
UP BJP New Team 2026: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। विस चुनाव में जीत की ‘हैट्रिक’ सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रभावी रणनीति पर फोकस कर रखा है। इसी क्रम में यूपी में भाजपा संगठन की नई तस्वीर सामने आ चुकी है। प्रदेश संगठन की सूची का लंबे समय से इंतजार हो रहा था। यह इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम तैयार है। यह टीम जमीनी स्तर पर काम कर संगठन को और ज्यादा मजबूत करेगी।
चुनावी चक्रव्यूह के लिए तैयार हुए ’46 महारथी’
नई टीम में 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री और 19 मंत्री बनाए गए हैं। इसके अलावा छह क्षेत्रीय अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। भाजपा ने अल्पसंख्यक मोर्चा को छोड़कर बाकी सभी अध्यक्ष भी तय कर दिए हैं। अगले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह पूरी कवायद की गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह को उपाध्यक्ष पद का दायित्व मिला है। नीरज सिंह बेहद जुझारू एवं काबिल नेता माने जाते हैं। खासकर युवा वर्ग के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने नई टीम में सभी वर्गों का बराबर ख्याल रखा है।
उन्होंने कुछ महिलाओं को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नई दिल्ली और लखनऊ में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद संगठन की नई टीम को मंजूरी मिल पाई है। यूपी की सत्ता में पिछले नौ साल से अधिक समय से भाजपा का दबदबा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम को आम जनता ने पसंद किया है। अगले साल भाजपा पुन: चुनाव मैदान में उतरेगी। विस चुनाव में वह जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने को उतावली है। ऐतिहासिक विजय का परचम लहराने के लिए संगठन को अपडेट करना जरूरी समझा गया है। प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी और उनकी टीम पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सोशल इंजीनियरिंग का अचूक फॉर्मूला: ठाकुर, ब्राह्मण, ओबीसी और दलितों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
भाजपा में अनुशासन और मान-सम्मान को महत्व दिया जाता है। पार्टी के भीतर चाहे कितनी बड़ी कलह हो जाए, मगर समझदार पदाधिकारी तुरंत सक्रिय होकर मामले को शांत करा लेने में माहिर माने जाते हैं। भाजपा ने यूपी में उपाध्यक्षों के चयन में जातीय समीकरण का विशेष ख्याल रखा है। पार्टी ने अपने कोर वोट बैंक सवर्ण जातियों के साथ-साथ ओबीसी और दलित समुदाय को प्रमुखता दी है। सबसे ज्यादा ठाकुर जाति से चार उपाध्यक्ष बनाए गए हैं तो ओबीसी समुदाय की अलग-अलग जातियों से आठ नेताओं को उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा ब्राह्मण समाज से तीन तथा वैश्य एवं दलित समाज से दो-दो नेताओं पर भरोसा जताया गया है।
भाजपा ने यूपी में जातीय के साथ क्षेत्रीय समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है। पार्टी ने संगठन के अनुरूप सूबे को छह जोन में बांट रखा है। अलग-अलग जोन के जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त भाजपा ने संगठन के माध्यम से सपा के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) फार्मूले की काट ढूंढने का प्रयास किया है।
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प्रदेश संगठन में दलित और पिछड़ों के साथ अति पिछड़ी जाति के व्यक्तियों को महत्व दिया गया है। कुल मिलाकर भाजपा की नई टीम प्रभावशाली दिखाई पड़ती है। इस टीम को अभी से चुनावी मोड में आना होगा। चूंकि वक्त का पहिया तेजी से चलता है और चुनावी मौसम कब नजदीक आ जाएगा, मालूम भी नहीं पड़ेगा। उधर, यूपी में भाजपा को मात देने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) अपने सहयोगी दलों से बातचीत में जुट गई है। माना जाता है कि अगला चुनाव सपा द्वारा गठबंधन में लड़ा जाएगा।

