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शहबाज शरीफ की कुर्सी खतरे में, क्या जनरल आसिम मुनीर बनने जा रहे हैं पाकिस्तान के नए सर्वेसर्वा

पड़ोसी देश पाकिस्तान से इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसीन नकवी के एक बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

मोहसीन नकवी ने देश के मौजूदा हालातों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ‘सिस्टम ध्वस्त’ हो चुका है। उनके इस बयान के बाद सत्ता के गलियारों में ऊपर से लेकर नीचे तक खलबली मच गई है। क्या पाकिस्तान में एक बार फिर तख्तापलट होने वाला है? क्या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की छुट्टी होने वाली है? और क्या सेना प्रमुख आसिम मुनीर देश की बागडोर सीधे अपने हाथों में लेने की तैयारी कर रहे हैं? इन तमाम सवालों ने सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हलचल बढ़ा दी है।

पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर में बढ़ी अदावत

पाकिस्तान की राजनीति में सेना और सरकार के बीच वर्चस्व की जंग नई नहीं है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। खबरें आ रही हैं कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बीच दूरियां और अदावत काफी बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो मुलाकातों के बाद से जनरल मुनीर खुद को देश का सबसे ताकतवर शख्स मान रहे हैं।

अब चर्चा इस बात की है कि मुनीर, शहबाज शरीफ को हटाकर सत्ता की कमान अपने किसी बेहद करीबी को सौंपना चाहते हैं। गृह मंत्री मोहसीन नकवी के ‘सिस्टम ध्वस्त’ वाले बयान को इसी राजनीतिक उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है। नकवी को सेना प्रमुख मुनीर का काफी करीबी माना जाता है, इसलिए यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में मोहसीन नकवी देश के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

अंदरूनी विद्रोह और अफगानिस्तान से बिगड़ते रिश्ते

केवल राजनीतिक खींचतान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान आंतरिक मोर्चे पर भी चौतरफा घिर चुका है। पीओके (PoK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में आम जनता सरकार और फौज के खिलाफ खुलकर बगावत कर चुकी है।

पीओके में प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए ताकत का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हालात और भी विस्फोटक हो गए हैं। इसके अलावा, अफगानिस्तान के साथ भी पाकिस्तान के रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान का मौजूदा ढांचा अंदर से पूरी तरह खोखला हो चुका है।

भारत के कड़े रुख और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान में हड़कंप

इन तमाम अंदरूनी संकटों के बीच भारत के साथ पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्ते आग में घी का काम कर रहे हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने बेहद कड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए अपनी रणनीतिक ताकत का अहसास कराने के साथ-साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को भी सस्पेंड कर दिया है।

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संधि की बहाली के लिए इस्लामाबाद दुनिया भर के देशों से गुहार लगा रहा है, लेकिन भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’। भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

भारत की पैनी नजर: सेना की कठपुਤली बन सकता है अगला प्रधानमंत्री

पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व में होने वाले संभावित बदलावों पर नई दिल्ली बेहद पैनी नजर रखेगा। जानकारों का मानना है कि यदि शहबाज शरीफ की जगह कोई नया प्रधानमंत्री बनता भी है, तो वह सीधे तौर पर सेना प्रमुख आसिम मुनीर के इशारों पर चलने वाली एक ‘कठपुतली’ ही होगा। ऐसे में पाकिस्तान की नीति में भारत विरोधी तेवर और अधिक आक्रामक हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह चौकन्ना रहना होगा।

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