यूरोप में इमरजेंसी! स्पेन बॉर्डर पर उमड़ी हजारों की भीड़, मोरक्को से अवैध घुसपैठ ने उड़ाई दुनिया की नींद
अवैध घुसपैठ की समस्या आज किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दुनिया के बड़े और विकसित देशों के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। हालांकि, चीन जैसे कुछ देश अपनी उच्चस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और सख्त चौकसी के चलते इस पर काफी हद तक नियंत्रण पाने में सफल रहे हैं, लेकिन अन्य राष्ट्रों के लिए बॉर्डर पर उन्मादी भीड़ और अनचाहे शरणार्थियों के बोझ को संभालना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश लंबे समय से इस तरह के दबाव का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत में अवैध घुसपैठ और रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के प्रवेश ने आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी (Demography) को लेकर जटिल संकट खड़ा कर दिया है।
स्पेन में उपजा संकट: मोरक्को सीमा पर हालात बेकाबू
वर्तमान समय में यूरोपीय देश स्पेन अवैध प्रवासियों के एक भारी सैलाब का सामना कर रहा है। मोरक्को की सीमा से लगे इलाकों में भारी हलचल मची हुई है और स्थिति को संभालने के लिए सेना को मोर्चा संभालना पड़ा है। मोरक्को के तटीय शहर ‘फनी देक’ से स्पेन की दूरी महज 3 से 5 किलोमीटर है। एक तरफ मोरक्को में फैली बेरोजगारी, भुखमरी और बदहाली है, तो दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (EU) का समृद्ध देश स्पेन है।
अनुकूल मौसम का फायदा उठाकर हजारों नागरिक समुद्र तैरकर स्पेन के तटीय शहरों में घुसने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्पेन में लगभग इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं और इस दौरान कई लोगों की डूबने से मौत भी हो चुकी है।
अदालती फैसले की आड़ और आपराधिक नेटवर्क का फायदा
स्पेन में इस अचानक उपजे संकट के पीछे एक बड़ा कारण वहां की सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला है, जिसमें यह कहा गया था कि समुद्र में रोके गए प्रवासियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के तत्काल मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता।
इसी फैसले की आड़ में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और फैलाई गई अफवाहों के कारण हजारों नागरिक एक साथ स्पेनिश सीमा पर टूट पड़े। स्पेन की कुल आबादी बहुत ज्यादा नहीं है, हालांकि उसे अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए कामगारों की जरूरत होती है, लेकिन इस तरह अनियंत्रित रूप से हो रही घुसपैठ ने पूरे यूरोप की नींद उड़ा दी है।
भारत के संदर्भ में असम और पश्चिम बंगाल की संवेदनशीलता
स्पेन के इस मौजूदा घटनाक्रम से भारत को भी बहुत कुछ सीखने और बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम और पश्चिम बंगाल लंबे समय से बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ से बुरी तरह प्रभावित रहे हैं।
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इन दोनों राज्यों की बांग्लादेश के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा नदियों, दुर्गम दलदलों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। प्राकृतिक बाधाओं के कारण इन भौगोलिक क्षेत्रों में भौतिक रूप से कंटीली बाड़ (Fencing) लगाना बेहद कठिन होता है, जिसका फायदा उठाकर मानव तस्कर और घुसपैठिए आसानी से भारतीय सीमा में दाखिल हो जाते हैं।
आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए बड़ा खतरा
घुसपैठ को केवल एक सीमा पार करने का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौती माना जाता है। अवैध प्रवासन के कारण सीमावर्ती राज्यों की जनसांख्यिकी में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है, साथ ही फर्जी दस्तावेजों के सहारे यहाँ नागरिकों के बसने की समस्याएं भी बढ़ी हैं।
बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की अवैध घुसपैठ के चलते भारत को लगातार गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर देश के सामाजिक सद्भाव, कानून-व्यवस्था और सीमित आर्थिक संसाधनों पर पड़ रहा है। स्पेन के हालिया हालातों को देखते हुए भारत को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा तंत्र को और अधिक चाक-चौबंद करने की सख्त जरूरत है।

