लाखों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान, योगी सरकार ने लागू किया डबल पेमेंट का धांसू नियम
लाखों श्रमिक परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरा कदम उठाया है। सुबह घर से निकलकर पसीना बहाने वाला हर मजदूर जब शाम को थका-हारा घर लौटता है, तो उसके जहन में परिवार का खर्च चलाने और बच्चों के भविष्य की चिंता रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए योगी कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब राज्य का कोई भी पात्र कर्मचारी तय न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं पाएगा। यदि कोई कंपनी या ठेकेदार तय नियमों से कम वेतन देने की कोशिश करेगा, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ओवरटाइम का मिलेगा दोगुना पैसा और 50% होगी बेसिक सैलरी
इस पूरी नई व्यवस्था में सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित बदलाव ओवरटाइम को लेकर किया गया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपनी तय शिफ्ट से अधिक समय तक काम यानी ओवरटाइम करता है, तो उसे अब सामान्य दरों के बजाय दोगुनी दर से भुगतान मिलेगा। इसके साथ ही सरकार ने बेसिक सैलरी को लेकर भी कड़ा नियम बनाया है, जिसके तहत कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा अब बेसिक सैलरी होना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस बदलाव से पीएफ (PF), ईएसआई (ESI) और ग्रेचुटी जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा काफी मजबूत होगा। साथ ही महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए समान काम के बदले समान वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया है, और नौकरी छोड़ने पर दो दिनों के भीतर पूरा बकाया चुकाना होगा।
आंगनबाड़ी, आशा बहनों और रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी
योगी सरकार के इन फैसलों का दायरा केवल फैक्ट्रियों या निजी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ सरकारी योजनाओं से जुड़े जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को भी मिलने वाला है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिए हैं कि अनुपूरक बजट के माध्यम से 7 लाख से अधिक मानदेय कर्मियों के वेतन में बंपर बढ़ोतरी की जाएगी। इस दायरे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहनें, ग्राम चौकीदार और सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइया शामिल हैं। वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे इन कर्मियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निगम गठन और पारदर्शी व्यवस्था
राज्य में लंबे समय से विभिन्न विभागों और संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही ‘आउटसोर्स सेवा निगम’ पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगा। इस निगम के गठन का मुख्य उद्देश्य आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक निश्चित न्यूनतम मानदेय तय करना और पूरे भुगतान तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना है। वर्तमान में अलग-अलग जगह अलग-अलग मानदेय मिलने की समस्या से जूझ रहे कर्मचारियों को इस व्यवस्था से बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

