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क्रिकेट जगत के 5 सबसे झूठे UMPIRE, एक तो मैदान पर मार खाते खाते बचा

क्रिकेट के मैदान पर तकनीक के आने से पहले मैच का भाग्य पूरी तरह अंपायर की उंगली पर निर्भर करता था। आज डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानी डीआरएस ने खिलाड़ियों को गलत फैसलों के खिलाफ चुनौती देने का अधिकार दे दिया है लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब मैदान पर अंपायर का निर्णय ही अंतिम कानून होता था। उस दौर में अंपायरों के कुछ विवादित और पक्षपाती फैसलों ने न केवल दिग्गज बल्लेबाजों के करियर को प्रभावित किया बल्कि कई बार पूरी टेस्ट सीरीज की दिशा भी बदल दी।

स्टीव बकनर और भारतीय टीम के बीच तनावपूर्ण इतिहास

वेस्टइंडीज के दिग्गज अंपायर स्टीव बकनर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 से अधिक टेस्ट मैचों में अंपायरिंग करने वाले पहले अधिकारी थे। उन्होंने अपने करियर में 126 टेस्ट और 179 वनडे मैचों के साथ पांच विश्व कप फाइनल में जिम्मेदारी निभाई। इसके बावजूद उनका करियर कई बड़े विवादों के कारण हमेशा सवालों के घेरे में रहा। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच बकनर के फैसलों को लेकर गहरा रोष देखने को मिला खासकर सचिन तेंदुलकर के खिलाफ दिए गए कई गलत आउट फैसलों की वजह से।

साल 2003 का गाबा टेस्ट हो या 2008 का बहुचर्चित सिडनी टेस्ट, बकनर के फैसलों ने खेल भावना पर गंभीर सवाल खड़े किए। 2008 के सिडनी टेस्ट में हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच हुए विवाद के बाद अंपायरिंग के गिरते स्तर को देखते हुए बीसीसीआई ने कड़ा विरोध जताया था। इसके चलते आईसीसी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बकनर को अगले पर्थ टेस्ट की अंपायरिंग सूची से हटाकर बिली बॉडेन को जिम्मेदारी सौंपी थी।

शकूर राणा और माइक गैटिंग का ऐतिहासिक टकराव

पाकिस्तानी अंपायरों के विवादित फैसलों का इतिहास भी बेहद पुराना रहा है। 1987-88 के फैसलाबाद टेस्ट के दौरान पाकिस्तानी अंपायर शकूर राणा और इंग्लैंड के कप्तान माइक गैटिंग के बीच मैदान पर तीखी नोकझोंक हुई थी। राणा ने गैटिंग पर खुलेआम खेल में बेईमानी का आरोप लगाया जिसके कारण मैच को पूरे एक दिन के लिए रोकना पड़ा था। अगर थोड़ा सा विवाद और होता तो मैदान पर हाथापाई की भी नौबत आ सकती थी। इस अप्रिय घटना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तटस्थ अंपायरों की नियुक्ति की जरूरत को जन्म दिया।

अलीम डार, नदीम गौरी और असद रऊफ के विवाद

पाकिस्तान के स्टार अंपायर अलीम डार ने अपने दो दशक के करियर में कई शानदार उपलब्धियां हासिल कीं लेकिन उनके कुछ फैसलों पर भी सवाल उठे। 2006 में भारत पाकिस्तान कराची वनडे और जनवरी 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में खराब रोशनी के चलते मैच जल्दी रोकने के फैसले पर उनकी जमकर आलोचना हुई थी।

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वहीं पाकिस्तान के दो अन्य अंपायर नदीम गौरी और असद रऊफ का करियर गंभीर बेमानी के आरोपों में घिर गया। नदीम गौरी को भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने के बाद प्रतिबंधित किया गया। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक सेवा देने वाले असद रऊफ आईपीएल में सट्टेबाजी और अनुचित उपहार स्वीकार करने के आरोपों के कारण खेल से बाहर हो गए।

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